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व्रत एवं पर्व📜 पद्म पुराण, स्कन्द पुराण (वैशाख माहात्म्य), विष्णु पुराण2 मिनट पठन

वैशाख मास में दान का क्या विधान है

संक्षिप्त उत्तर

वैशाख दान: सर्वोत्तम दान मास। जलदान (प्रमुख — ग्रीष्म), सत्तू, छाता, पंखा, जूता-चप्पल, फल। अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल 3) = अक्षय फल। बुद्ध पूर्णिमा। 'वैशाखे...तत्सर्वमक्षयं' — वैशाख दान = अक्षय। पद्मपुराण, स्कन्दपुराण में माहात्म्य।

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विस्तृत उत्तर

वैशाख मास (अप्रैल-मई) दान के लिए सर्वोत्तम माना गया है। पद्म पुराण में वैशाख माहात्म्य का विस्तृत वर्णन है।

विशेष दान

  1. 1जलदान (सर्वोत्तम): ग्रीष्म ऋतु में प्यासों को जल पिलाना सबसे बड़ा दान — प्याऊ लगाना, सार्वजनिक जल व्यवस्था।
  2. 2सत्तू दान: सत्तू + शक्कर + जल = गर्मी में शीतल पेय। अत्यन्त पुण्यदायी।
  3. 3छाता/पंखा दान: धूप से रक्षा।
  4. 4जूता-चप्पल दान: गर्म भूमि से पैरों की रक्षा।
  5. 5फल दान: खरबूजा, ककड़ी, आम, तरबूज।
  6. 6अन्नदान, वस्त्रदान।

स्नान

वैशाख में प्रातः स्नान (वैशाख स्नान) भी शुभ — सूर्योदय से पूर्व।

अक्षय तृतीया

वैशाख शुक्ल तृतीया = अक्षय तृतीया — इस दिन दान अक्षय (अनन्त) फल देता है।

परशुराम जयन्ती

वैशाख शुक्ल तृतीया — भगवान परशुराम जन्म।

बुद्ध पूर्णिमा

वैशाख पूर्णिमा — बुद्ध जन्म/ज्ञान/निर्वाण। स्नान-दान का विशेष पुण्य।

शास्त्रीय उक्ति

वैशाखे मासि या दत्ता दक्षिणा यत्र कुत्रचित्। तत्सर्वमक्षयं विद्यात् प्रसादात् केशवस्य च॥' — वैशाख में कहीं भी दिया गया दान अक्षय होता है।
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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण, स्कन्द पुराण (वैशाख माहात्म्य), विष्णु पुराण
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