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जीवन एवं मृत्यु⏱ 2 मिनट पठन

यममार्ग में जीव को जल किस प्रकार मिलता है?

यममार्ग पर स्वच्छ जल का घोर अभाव है। जिसने जीवन में जलदान किया, उसे यहाँ कुछ राहत मिलती है। पापी को कहीं जल नहीं मिलता।

संक्षिप्त उत्तर

यममार्ग पर स्वच्छ जल का घोर अभाव है। जिसने जीवन में जलदान किया, उसे यहाँ कुछ राहत मिलती है। पापी को कहीं जल नहीं मिलता। वैतरणी का जल रक्त-मवाद से भरा है — वह और यातना देता है।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में यममार्ग पर जल मिलने का वर्णन जीव के जीवनकाल के दान-कर्म से जोड़कर किया गया है।

गरुड़ पुराण के द्वितीय अध्याय में स्पष्ट उल्लेख है — 'वहाँ कहीं जल भी नहीं दिखता, जिसे अत्यंत तृषातुर वह जीव पी सके।' यममार्ग पर स्वच्छ जल का घोर अभाव है।

जलदान करने वाले के लिए — जिस व्यक्ति ने जीवन में जलदान किया हो — प्यासों को जल पिलाया हो, तालाब या कुआँ बनवाया हो — उसे यममार्ग पर और वैतरणी में उसी दान का फल मिलता है। शास्त्र में विश्वास किया जाता है कि ऐसे जीव को मार्ग में जल का आभास होता है।

पापी के लिए — जिसने जलदान नहीं किया, उसे इस मार्ग पर कहीं जल नहीं मिलता। वह प्यास से तड़पता रहता है। यमदूत उसे जल पीने नहीं देते।

वैतरणी का जल — वैतरणी में जो 'जल' मिलता है वह रक्त, मवाद और दुर्गंधयुक्त है — वह जल नहीं, यातना है।

इसीलिए शास्त्र में जलदान को महापुण्य कहा गया है। पानी की प्याऊ लगाना, गर्मी में जल पिलाना — ये सब मृत्यु के बाद के कल्याण के साधन हैं।

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