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विस्तृत उत्तर
दान का सही लक्षण न्यायपूर्वक अर्जित अभीष्टतम द्रव्य को गुणी पात्र को देना है। पाठ में कहा गया है कि दाता द्वारा दिया गया दान इसी प्रकार होना चाहिए। दान तीन प्रकार का बताया गया है: कनिष्ठ, मध्यम और श्रेष्ठ। करुणापूर्वक सभी प्राणियों के निमित्त धन का विभाग करना मध्यम दान कहा गया है। इसलिए दान में धन की शुद्ध कमाई, पात्रता और करुणा तीनों महत्त्वपूर्ण हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59, श्लोक 20-21
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