ध्यान साधनाध्यान से करुणा कैसे बढ़ती है?ध्यान→करुणा: (1) अहंकार विलय→भेद कम (2) अनाहत चक्र खुलना (3) योगसूत्र 1.33: 'दुःखी पर करुणा=चित्त प्रसन्न' (4) साक्षी भाव→सच्ची करुणा (5) एकता बोध (सब एक) (6) मन शांत→हृदय सुनाई। अभ्यास: मैत्री ध्यान ('सभी सुखी हों')। वैज्ञानिक: ध्यान=मस्तिष्क करुणा क्षेत्र↑।#करुणा#मैत्री ध्यान#अनाहत चक्र
श्रीमद्भागवतद्रौपदी और अश्वत्थामा की कथा क्या है?अश्वत्थामा ने द्रौपदी के पुत्रों को मारा, पर बँधा हुआ लाए जाने पर द्रौपदी ने गुरु-पुत्र और ब्राह्मण समझकर उसे छोड़ने को कहा।#द्रौपदी#अश्वत्थामा
दान और साधुधर्मदान कितने प्रकार का बताया गया है?दान तीन प्रकार का बताया गया है: कनिष्ठ, मध्यम और श्रेष्ठ।#दान#कनिष्ठ दान#मध्यम दान
दान और साधुधर्मदान का सही लक्षण क्या है?न्यायपूर्वक अर्जित प्रिय द्रव्य को गुणी पात्र को देना दान का लक्षण है।#दान#न्यायपूर्वक धन#गुणी पात्र
धर्म और आचारदया किसे कहा गया है?अपने हित-अहित की तरह सभी प्राणियों के हित-अहित का ध्यान रखने वाली निरंतर वृत्ति दया है।#दया#सभी प्राणी#हिताहित
श्राद्ध दर्शनगरीब आदमी श्राद्ध कैसे करे?विष्णु पुराण में निर्धन व्यक्तियों के लिए तीन करुणामय विकल्प हैं। पहला, थोड़ा सा कच्चा धान या एक मुट्ठी तिल जल के साथ ब्राह्मण को दान। दूसरा, गाय को एक दिन का चारा श्रद्धापूर्वक खिलाना। तीसरा, एकांत वन में आकाश की ओर भुजाएं उठाकर पितरों से अश्रुपूर्ण श्रद्धा से प्रार्थना। श्राद्ध श्रद्धा से होता है, धन से नहीं।#निर्धन श्राद्ध#विष्णु पुराण विकल्प#करुणा
लोकसत्यलोक का आध्यात्मिक संदेश क्या है?सत्यलोक का संदेश — ब्रह्मांड के शीर्ष पर भी मोक्ष नहीं, पूर्ण ज्ञान करुणा बढ़ाता है, क्रम मुक्ति अंततः मोक्ष देती है और यह भौतिकता-आध्यात्मिकता का अंतिम सेतु है।#सत्यलोक#आध्यात्मिक संदेश#करुणा
लोकसत्यलोक के निवासियों की करुणा का दार्शनिक अर्थ क्या है?सत्यलोक की करुणा अद्वैत ज्ञान से उत्पन्न है — जब जीव समस्त प्राणियों में स्वयं को देखता है तो उनकी पीड़ा उसकी अपनी पीड़ा बन जाती है। यह 'सर्वम् ब्रह्म' की अनुभूति है।#करुणा#दार्शनिक#अद्वैत
लोकसत्यलोक के निवासियों को करुणा क्यों होती है?सत्यलोक के निवासी पूर्ण चेतना और अद्वैत ज्ञान के कारण अज्ञानी जीवों की पीड़ा को अपनी पीड़ा मानते हैं। यह करुणा अभाव से नहीं, परम ज्ञान से उत्पन्न होती है।#करुणा#सत्यलोक#अज्ञानी
लोकभागवत पुराण में सत्यलोक का क्या वर्णन है?भागवत सत्यलोक को दार्शनिक और भक्ति दृष्टि से देखता है। यह सत्यलोक और शाश्वत वैकुंठ का भेद करता है और निवासियों की करुणा-भावना का अनूठा चित्रण करता है।#भागवत पुराण#सत्यलोक#दार्शनिक
लोकसत्यलोक में दुःख होता है क्या?सत्यलोक में कोई दुःख, शोक, पीड़ा या उद्वेग नहीं है। परंतु यहाँ के निवासियों को अज्ञानी जीवों के प्रति करुणा अवश्य होती है।#सत्यलोक#दुःख#शोक
शिव का बाह्य स्वरूप और प्रतीकनीलकंठ नाम का क्या अर्थ है?समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष शिव ने अपने कंठ में धारण किया → कंठ नीला पड़ा → नाम 'नीलकंठ'। यह संसार के दुखों और नकारात्मकता को स्वयं में समाहित कर समाज की रक्षा करने की असीम करुणा का प्रतीक है।#नीलकंठ#हलाहल विष#करुणा
शिव तत्त्व परिचय'रुद्र' शब्द का क्या अर्थ है?'रुद्र' = 'रुत् दूर करने वाला'। 'रुत्' = सांसारिक दुःख, पीड़ा, व्याधि, अज्ञान। जो जीवों के सभी दुखों और जन्म-मृत्यु के चक्र रूपी रुदन का हरण करता है वही 'रुद्र' है। ईश्वर की कठोरता के पीछे भी परम करुणा है।#रुद्र अर्थ#दुःख हरण#करुणा
ध्यान साधनाध्यान से करुणा कैसे बढ़ती है?ध्यान→करुणा: (1) अहंकार विलय→भेद कम (2) अनाहत चक्र खुलना (3) योगसूत्र 1.33: 'दुःखी पर करुणा=चित्त प्रसन्न' (4) साक्षी भाव→सच्ची करुणा (5) एकता बोध (सब एक) (6) मन शांत→हृदय सुनाई। अभ्यास: मैत्री ध्यान ('सभी सुखी हों')। वैज्ञानिक: ध्यान=मस्तिष्क करुणा क्षेत्र↑।#करुणा#मैत्री ध्यान#अनाहत चक्र
कुंडलिनी योगअनाहत चक्र खुलने पर हृदय में कैसा अनुभव होता है?अनाहत: (1) हृदय विस्तार (2) सार्वभौमिक प्रेम (3) सहज करुणा (4) अनाहत नाद (5) Emotional Release (रोना) (6) सृजनशीलता↑ (7) हरा/गुलाबी प्रकाश (8) सम्बंध गहराई। संवेदनशीलता=संतुलन। हृदय दर्द=चिकित्सक।#अनाहत चक्र#हृदय चक्र#प्रेम