विस्तृत उत्तर
अन्नकूट (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा — दीपावली अगला दिन) में गोवर्धन पर्वत बनाने की विधि:
1. सामग्री: गाय का ताज़ा गोबर (प्रमुख), फूल, पत्तियाँ।
2. आकृति: गोबर से लेटे हुए पुरुष (गिरिराज) की आकृति बनाएँ — सिर, हाथ, पैर स्पष्ट। लम्बाई ~2-3 फीट (यथास्थान)। कुछ परम्पराओं में पर्वत आकार (शंक्वाकार)।
3. नाभि पर कटोरा: आकृति की नाभि स्थान पर छोटा कटोरा/दोना रखें — इसमें दूध/दही डालेंगे।
4. सजावट: फूल, तुलसी, दूर्वा, रंगोली से सजाएँ। गोवर्धन पर गाय-बछड़े की छोटी आकृतियाँ (गोबर से)।
5. पूजा: गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन। 'श्री गिरिराज धरण की जय' स्तुति।
6. अन्नकूट भोग: 56 भोग (छप्पन भोग) या यथाशक्ति — चावल, दाल, रोटी, सब्जी, खीर, हलवा, मिठाई, फल — गोवर्धन जी के सामने सजाएँ।
7. नाभि में दूध/दही: कटोरे में दूध या दही डालें।
8. परिक्रमा: गोवर्धन जी की 7 परिक्रमा (सम्भव हो तो)।
9. गाय पूजा: गाय को रोटी, गुड़, चारा खिलाएँ — गौ सेवा।
भागवत कथा: कृष्ण ने ब्रजवासियों से कहा — इन्द्र नहीं, गोवर्धन पूजो (गाय+प्रकृति = सच्चा देवता)। इन्द्र कुपित → 7 दिन वर्षा → कृष्ण ने गोवर्धन उठाया।





