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पर्व📜 भागवत पुराण, वैष्णव सम्प्रदाय परम्परा2 मिनट पठन

अन्नकूट पूजा की विधि क्या है

संक्षिप्त उत्तर

अन्नकूट: 56 (छप्पन) प्रकार के व्यंजन = अन्न का पर्वत। कृष्ण/गोवर्धन को अर्पित → भोग → प्रसाद वितरण। 56 = 7 दिन × 8 प्रहर (गोवर्धन उठाने की अवधि)। श्रीनाथजी, जगन्नाथ, वृन्दावन मन्दिरों में भव्य। यथाशक्ति व्यंजन बनाएँ।

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विस्तृत उत्तर

अन्नकूट ('अन्न का पर्वत') गोवर्धन पूजा का प्रमुख अंग है — कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा।

विधि

  1. 1विविध व्यंजन तैयार करें: छप्पन भोग (56 प्रकार) आदर्श, किन्तु यथाशक्ति जितने बन सकें। इनमें:
  • चावल, दाल, रोटी, पूड़ी, कचौड़ी
  • विभिन्न सब्जियाँ, रायता, अचार
  • खीर, हलवा, लड्डू, पेड़ा, बर्फी
  • फल, मिठाई, पकौड़े
  1. 1सभी व्यंजनों को सुन्दर ढंग से सजाकर भगवान कृष्ण/गोवर्धन जी के सामने रखें — 'अन्न का पर्वत' बनाएँ।
  2. 2भगवान कृष्ण का पूजन — पुष्प, तुलसी, चन्दन, दीप।
  3. 3'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जप।
  4. 4भगवान को भोग लगाएँ — कुछ देर भोग रखें।
  5. 5प्रसाद वितरण — परिवार, पड़ोसी, गरीबों को।

छप्पन भोग क्यों

जब इन्द्र ने 7 दिन वर्षा की, कृष्ण ने 7 दिन (= 7 × 8 = 56 भोजन प्रहर) गोवर्धन उठाए रखा। इन 56 प्रहरों में ब्रजवासी भोजन से वंचित रहे — उन्हीं 56 प्रहरों के भोजन की पूर्ति हेतु छप्पन भोग।

वैष्णव मन्दिरों में: श्रीनाथजी (नाथद्वारा), जगन्नाथ पुरी, वृन्दावन मन्दिरों में अन्नकूट अत्यन्त भव्य होता है।

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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण, वैष्णव सम्प्रदाय परम्परा
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