विस्तृत उत्तर
शरद पूर्णिमा (आश्विन शुक्ल पूर्णिमा) की रात खीर चाँदनी में रखने की परम्परा अत्यन्त प्रसिद्ध है।
कारण
1चन्द्र अमृत वर्षा
शास्त्रों और आयुर्वेद में मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चन्द्रमा अपनी सोलहों कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है। इस रात चन्द्र किरणों में औषधीय गुण सर्वाधिक होते हैं।
2आयुर्वेदिक कारण
- ▸शरद ऋतु में पित्त दोष बढ़ता है (ग्रीष्म में संचित पित्त शरद में प्रकुपित)।
- ▸चन्द्रमा शीतल है — उसकी किरणें पित्त शामक।
- ▸दूध + चावल (खीर) = शीतल, पित्त शामक।
- ▸चाँदनी में रखने से खीर में चन्द्र किरणों का शीतल गुण समाहित होता है।
3भागवत पुराण
इसी रात भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ महारासलीला की थी। खीर = भक्ति और प्रेम का प्रसाद।
4लक्ष्मी पूजन
शरद पूर्णिमा को 'कोजागरी पूर्णिमा' भी कहते हैं — लक्ष्मी जी रात्रि में भ्रमण कर 'कोजागरी' (कौन जाग रहा है?) पूछती हैं और जागने वालों को धन देती हैं।
खीर रखने की विधि
- ▸शुद्ध दूध और चावल (बासमती) की खीर बनाएँ, मिश्री/शक्कर + इलायची + केसर।
- ▸चाँदी के पात्र में (सम्भव हो तो) खुले आकाश में चाँदनी में रखें।
- ▸प्रातःकाल प्रसाद रूप में ग्रहण करें।




