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पर्व📜 स्कन्द पुराण, गुरु गीता (स्कन्द पुराण), योग परम्परा1 मिनट पठन

गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजा कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

गुरु पूर्णिमा: आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा = व्यास जन्मदिन। गुरु/व्यास पादुका पूजा → 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...' जप → गुरु गीता पाठ → चरण स्पर्श → दक्षिणा → विद्वान भोजन। गुरु = ब्रह्मा-विष्णु-शिव स्वरूप।

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विस्तृत उत्तर

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसे 'व्यास पूर्णिमा' भी कहते हैं — महर्षि वेदव्यास का जन्मदिन।

पूजा विधि

  1. 1प्रातः स्नान → शुद्ध वस्त्र।
  2. 2गुरु के चित्र/पादुका (चरण चिह्न) या व्यास जी की प्रतिमा स्थापित करें।
  3. 3पंचोपचार/षोडशोपचार पूजा — चन्दन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य।
  4. 4गुरु मंत्र जप: 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥'
  5. 5गुरु स्तोत्र/गुरु गीता पाठ।
  6. 6गुरु के चरण स्पर्श → आशीर्वाद प्राप्ति।
  7. 7गुरु दक्षिणा — यथाशक्ति धन, वस्त्र, फल।
  8. 8विद्वानों/ब्राह्मणों को भोजन और दान।

व्यास पूजा

यदि गुरु उपस्थित न हों, तो वेदव्यास जी की पूजा करें — वे सम्पूर्ण ज्ञान परम्परा के प्रतीक हैं।

महत्व: गुरु के बिना ज्ञान प्राप्ति असम्भव — 'ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः'। यह दिन कृतज्ञता का है।

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शास्त्रीय स्रोत
स्कन्द पुराण, गुरु गीता (स्कन्द पुराण), योग परम्परा
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