विस्तृत उत्तर
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसे 'व्यास पूर्णिमा' भी कहते हैं — महर्षि वेदव्यास का जन्मदिन।
पूजा विधि
- 1प्रातः स्नान → शुद्ध वस्त्र।
- 2गुरु के चित्र/पादुका (चरण चिह्न) या व्यास जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- 3पंचोपचार/षोडशोपचार पूजा — चन्दन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य।
- 4गुरु मंत्र जप: 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥'
- 5गुरु स्तोत्र/गुरु गीता पाठ।
- 6गुरु के चरण स्पर्श → आशीर्वाद प्राप्ति।
- 7गुरु दक्षिणा — यथाशक्ति धन, वस्त्र, फल।
- 8विद्वानों/ब्राह्मणों को भोजन और दान।
व्यास पूजा
यदि गुरु उपस्थित न हों, तो वेदव्यास जी की पूजा करें — वे सम्पूर्ण ज्ञान परम्परा के प्रतीक हैं।
महत्व: गुरु के बिना ज्ञान प्राप्ति असम्भव — 'ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः'। यह दिन कृतज्ञता का है।





