विस्तृत उत्तर
देव दीपावली कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है — दीपावली के 15 दिन बाद।
कब: कार्तिक पूर्णिमा (नवम्बर)।
क्यों: इस दिन देवता स्वयं दीपावली मनाते हैं — इसीलिए 'देव दीपावली'। शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर का वध किया था (त्रिपुरारी पूर्णिमा)।
कैसे मनाएँ
- 1प्रातः गंगा/नदी स्नान।
- 2शिव पूजा (त्रिपुरारी — त्रिपुरासुर विजय)।
- 3विष्णु पूजा और तुलसी पूजा।
- 4सन्ध्याकाल से दीपदान — घर, मन्दिर, नदी तट, पीपल, तुलसी पर।
- 5गंगा आरती (काशी में विश्वप्रसिद्ध)।
- 6लाखों दीये गंगा घाटों पर — काशी में यह दृश्य अद्भुत होता है।
- 7दान — अन्न, वस्त्र, दीपक दान।
काशी में विशेष
वाराणसी के सभी 84 घाटों पर लाखों दीये जलाए जाते हैं। गंगा आरती भव्य रूप में होती है। यह काशी का सबसे प्रमुख पर्व है।
फल: सर्वपापनाश, मोक्ष प्राप्ति, देवताओं का विशेष आशीर्वाद।





