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पर्व📜 पुराण, धर्मसिन्धु, ज्योतिष शास्त्र2 मिनट पठन

अक्षय तृतीया पर पूजा और दान कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

अक्षय तृतीया: वैशाख शुक्ल तृतीया। पूजा: विष्णु-लक्ष्मी पूजा, गंगा स्नान, सत्यनारायण कथा। दान: जल (सर्वोत्तम), अन्न, वस्त्र, छाता, स्वर्ण खरीद शुभ। सम्पूर्ण दिन स्वयंसिद्ध शुभ — मुहूर्त अनावश्यक। परशुराम जन्म, सुदामा-कृष्ण कथा। अक्षय = कभी क्षीण न हो।

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विस्तृत उत्तर

अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। यह स्वयंसिद्ध शुभ मुहूर्त है — इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय (कभी न क्षीण होने वाला) फल देता है।

पूजा विधि

  1. 1प्रातः स्नान → शुद्ध वस्त्र।
  2. 2भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा — पीले पुष्प, तुलसी, चन्दन।
  3. 3गंगा स्नान (सम्भव हो तो)।
  4. 4सत्यनारायण कथा/विष्णु सहस्रनाम पाठ।
  5. 5जल का घड़ा (कलश) दान — ग्रीष्म ऋतु में अत्यन्त पुण्य।

दान

इस दिन दान का विशेष अक्षय फल — प्रमुख दान:

  • जल दान (सबसे महत्वपूर्ण — गर्मी का मौसम)।
  • अन्नदान, वस्त्रदान, छाता/पंखा दान।
  • स्वर्ण/चाँदी खरीदना शुभ (लोकप्रिय परम्परा)।
  • सत्तू, चना, ककड़ी, खरबूजा, आम दान।
  • जूता-चप्पल दान।

पौराणिक महत्व

  • इस दिन त्रेतायुग का आरम्भ हुआ।
  • भगवान परशुराम का जन्म।
  • सुदामा ने कृष्ण को चावल भेंट किए — अक्षय धन प्राप्त किया।
  • गंगावतरण इसी दिन (कुछ परम्पराओं में)।
  • व्यास जी ने महाभारत लिखना आरम्भ किया।

विशेष: इस दिन मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं — सम्पूर्ण दिन शुभ है।

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शास्त्रीय स्रोत
पुराण, धर्मसिन्धु, ज्योतिष शास्त्र
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