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श्राद्ध-पितृ कर्म📜 गरुड़ पुराण, मत्स्य पुराण, वायु पुराण, धर्मसिंधु1 मिनट पठन

महालया पक्ष में पितरों के लिए पिंडदान का क्या विशेष विधान है?

संक्षिप्त उत्तर

महालया पिण्डदान: मृत्यु तिथि पर (अज्ञात=अमावस्या)। चावल+दूध+घी+गुड़+शहद+तिल। 12 पिण्ड। तर्पण: दक्षिण मुख, अपसव्य, तिल-जौ-कुश। पंचबलि। गया=पितृतीर्थ (108 कुल उद्धार)।

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विस्तृत उत्तर

महालया पक्ष (भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या) में पिण्डदान का विशेष विधान:

तिथि: जिस तिथि को पितर की मृत्यु हुई उसी तिथि पर श्राद्ध। तिथि अज्ञात = सर्वपितृ अमावस्या (अंतिम दिन) पर।

पिण्ड सामग्री: पके चावल + गाय का दूध + घी + गुड़ + शहद + काले तिल मिलाकर गोल पिण्ड। कुश आसन पर स्थापित।

12 पिण्ड विधान: 1.देवता 2.ऋषि 3.दिव्य मानव 4.दिव्य पितर 5.यम 6.मनुष्य पितर 7.मृतात्मा 8.पुत्र-दारा रहित 9.उच्छिन्न कुलवंश 10.गर्भपात मृतक 11-12.इस/अन्य जन्म बन्धु। प्रत्येक पर दूध-दही-मधु।

तर्पण: दक्षिणाभिमुख → अपसव्य जनेऊ → तिल-जौ-कुश-जल → पितृ तीर्थ मुद्रा → तीन-तीन अंजलि।

पंचबलि (गरुड़ पुराण): गोबलि, श्वानबलि, काकबलि, देवादिबलि, पिपीलिकादि बलि — पाँच प्राणियों को भोजन।

गया विशेष: मत्स्य पुराण: गया = 'पितृतीर्थ'। गरुड़ पुराण: गया पिण्डदान = 108 कुलों + 7 पीढ़ियों का उद्धार। भगवान राम-सीता ने दशरथ हेतु गया पिण्डदान किया।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, मत्स्य पुराण, वायु पुराण, धर्मसिंधु
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