विस्तृत उत्तर
महालया पक्ष (भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या) में पिण्डदान का विशेष विधान:
तिथि: जिस तिथि को पितर की मृत्यु हुई उसी तिथि पर श्राद्ध। तिथि अज्ञात = सर्वपितृ अमावस्या (अंतिम दिन) पर।
पिण्ड सामग्री: पके चावल + गाय का दूध + घी + गुड़ + शहद + काले तिल मिलाकर गोल पिण्ड। कुश आसन पर स्थापित।
12 पिण्ड विधान: 1.देवता 2.ऋषि 3.दिव्य मानव 4.दिव्य पितर 5.यम 6.मनुष्य पितर 7.मृतात्मा 8.पुत्र-दारा रहित 9.उच्छिन्न कुलवंश 10.गर्भपात मृतक 11-12.इस/अन्य जन्म बन्धु। प्रत्येक पर दूध-दही-मधु।
तर्पण: दक्षिणाभिमुख → अपसव्य जनेऊ → तिल-जौ-कुश-जल → पितृ तीर्थ मुद्रा → तीन-तीन अंजलि।
पंचबलि (गरुड़ पुराण): गोबलि, श्वानबलि, काकबलि, देवादिबलि, पिपीलिकादि बलि — पाँच प्राणियों को भोजन।
गया विशेष: मत्स्य पुराण: गया = 'पितृतीर्थ'। गरुड़ पुराण: गया पिण्डदान = 108 कुलों + 7 पीढ़ियों का उद्धार। भगवान राम-सीता ने दशरथ हेतु गया पिण्डदान किया।
