विस्तृत उत्तर
अमावस्या = पितरों की तिथि = तर्पण का सर्वश्रेष्ठ दिन:
- 1पितृ तिथि: अमावस्या = पितरों का दिन। इस दिन पितरों की आत्मा पृथ्वी के निकट आती है (मान्यता)। तर्पण = सीधे पितरों तक पहुँचता है।
- 1चन्द्रमा अनुपस्थित: अमावस्या = चन्द्रमा नहीं = अंधकार। पितर = अंधकार/दक्षिण/यम से सम्बद्ध। अंधकार की रात = पितरों का काल।
- 1दर्शामावस्या: दर्श = दर्शन। अमावस्या पर तर्पण = पितरों को 'दर्शन' (तृप्ति) देना।
- 1मासिक तर्पण: प्रत्येक अमावस्या पर तर्पण = 'दर्शश्राद्ध' = नित्य कर्तव्य (उपनीत द्विज)।
- 1सर्वपितृ अमावस्या (आश्विन): पितृ पक्ष की अमावस्या = सर्वाधिक पुण्यदायी। सभी पितरों का सामूहिक तर्पण।
विधि: प्रातः स्नान → दक्षिण मुख → अपसव्य जनेऊ → तिल-जौ-कुश-जल तर्पण → पिण्डदान (यथासम्भव) → ब्राह्मण भोज/दान।
विशेष: सोमवती अमावस्या (सोमवार), भौमवती (मंगलवार), शनिवार अमावस्या = विशेष पुण्यदायी।





