विस्तृत उत्तर
श्राद्ध में कौवे (काक) को भोजन (ग्रास/बलि) देना अनिवार्य विधान है:
- 1यमराज का वाहन/दूत: कौवा यमराज का वाहन/दूत माना जाता है। पितर यम लोक में रहते हैं — कौवे को भोजन = यमराज के माध्यम से पितरों तक भोजन पहुँचाना।
- 1पितर रूप: मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा कौवे के रूप में आती है। कौवा भोजन ग्रहण करे = पितर तृप्त।
- 1शकुन: श्राद्ध भोजन में कौवा आकर खाए = शुभ — पितर प्रसन्न हैं, श्राद्ध स्वीकृत। कौवा न आए = अशुभ संकेत — पितर किसी कारण से अतृप्त।
- 1पंचबलि: वैश्वदेव (पंचबलि) में पाँच प्राणियों को भोजन दिया जाता है — गाय, कुत्ता, कौवा, अग्नि (देव), अतिथि। कौवा = बलि का प्राणी।
- 1काकभुशुण्डि: गरुड़ पुराण/रामचरितमानस में काकभुशुण्डि (कौवा ऋषि) = प्राचीन ज्ञानी। कौवे का सम्मान = ज्ञान परम्परा का सम्मान।
विधि: श्राद्ध भोजन का एक अंश (पिण्ड या ग्रास) छत/खुले स्थान पर रखें। 'काकाय स्वाहा' बोलें।





