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श्राद्ध-पितृ कर्म📜 गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण2 मिनट पठन

श्राद्ध कर्म में कौआ को ग्रास क्यों देते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

कौवा ग्रास: यमराज दूत/वाहन (पितरों तक भोजन), पितर कौवा रूप में आते हैं, शकुन (कौवा खाए=पितर तृप्त), पंचबलि अंग, काकभुशुण्डि (ज्ञानी)। विधि: ग्रास छत/खुले में → 'काकाय स्वाहा।'

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विस्तृत उत्तर

श्राद्ध में कौवे (काक) को भोजन (ग्रास/बलि) देना अनिवार्य विधान है:

  1. 1यमराज का वाहन/दूत: कौवा यमराज का वाहन/दूत माना जाता है। पितर यम लोक में रहते हैं — कौवे को भोजन = यमराज के माध्यम से पितरों तक भोजन पहुँचाना।
  1. 1पितर रूप: मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा कौवे के रूप में आती है। कौवा भोजन ग्रहण करे = पितर तृप्त।
  1. 1शकुन: श्राद्ध भोजन में कौवा आकर खाए = शुभ — पितर प्रसन्न हैं, श्राद्ध स्वीकृत। कौवा न आए = अशुभ संकेत — पितर किसी कारण से अतृप्त।
  1. 1पंचबलि: वैश्वदेव (पंचबलि) में पाँच प्राणियों को भोजन दिया जाता है — गाय, कुत्ता, कौवा, अग्नि (देव), अतिथि। कौवा = बलि का प्राणी।
  1. 1काकभुशुण्डि: गरुड़ पुराण/रामचरितमानस में काकभुशुण्डि (कौवा ऋषि) = प्राचीन ज्ञानी। कौवे का सम्मान = ज्ञान परम्परा का सम्मान।

विधि: श्राद्ध भोजन का एक अंश (पिण्ड या ग्रास) छत/खुले स्थान पर रखें। 'काकाय स्वाहा' बोलें।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण
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