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श्राद्ध-पितृ कर्म📜 गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण, धर्मसिंधु2 मिनट पठन

महालया पक्ष में पितरों की पूजा कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

पितृ पक्ष: भाद्रपद पूर्णिमा से अमावस्या (16 दिन)। मृत्यु तिथि पर श्राद्ध (अज्ञात हो तो अमावस्या)। विधि: दक्षिण मुख → अपसव्य जनेऊ → तिल-जौ-कुश-जल तर्पण → पिण्डदान → ब्राह्मण भोज → कौवे को भोजन → दान। गया पिण्डदान सर्वश्रेष्ठ।

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विस्तृत उत्तर

महालया पक्ष (पितृ पक्ष) भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक का 16 दिन का काल है। इसमें पितरों (पूर्वजों) का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है।

पितृ पक्ष पूजा विधि

1. श्राद्ध तिथि निर्धारण: जिस तिथि को पितर की मृत्यु हुई हो, उसी तिथि को श्राद्ध करें। यदि तिथि ज्ञात न हो तो अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) पर करें।

1तर्पण विधि

  • दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • जनेऊ अपसव्य (दाहिने कंधे पर) करें।
  • हाथ में काले तिल, जौ, कुश और जल लेकर पितरों का नाम-गोत्र बोलते हुए तर्पण करें।
  • मंत्र: '(नाम) गोत्राय (पिता/माता आदि) तिलोदकं ददामि।'
  • पितृ तीर्थ मुद्रा (अंगूठे की ओर से) जल गिराएँ।

2पिण्डदान

  • चावल, तिल, जौ, दूध, शहद, घी से पिण्ड बनाएँ।
  • कुश (दर्भ) के आसन पर पिण्ड रखें।
  • पितरों को समर्पित करें।

4. ब्राह्मण भोज: श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराना अनिवार्य माना गया है। भोजन कराने के बाद दक्षिणा दें।

5. दान: वस्त्र, छाता, जूते, अन्न, फल, दक्षिणा — ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान।

6. कौवे को भोजन: कौवे को पितरों का दूत माना जाता है। भोजन का एक अंश कौवे को दें।

नियम: पितृ पक्ष में नया कार्य, शुभ कार्य (विवाह, गृह प्रवेश) नहीं करने चाहिए। सात्त्विक भोजन, ब्रह्मचर्य, क्षमा भाव।

विशेष: गया (बिहार) में पिण्डदान सर्वश्रेष्ठ माना गया है। काशी, प्रयाग, हरिद्वार में भी श्राद्ध अत्यंत पुण्यदायी।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण, धर्मसिंधु
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