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श्राद्ध-पितृ कर्म📜 मनुस्मृति, गरुड़ पुराण, भगवद्गीता (17.10)1 मिनट पठन

श्राद्ध के भोजन में लहसुन प्याज क्यों नहीं डालते?

संक्षिप्त उत्तर

प्याज-लहसुन वर्जित: तामसिक (गीता 17.10), राहु रक्त से उत्पन्न (पौराणिक), राजसिक उत्तेजक (काम-क्रोध), पितर अरुचि (तीव्र गंध)। श्राद्ध = केवल सात्त्विक। शुभ: चावल, खीर, पूड़ी, दूध, घी।

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विस्तृत उत्तर

श्राद्ध भोजन में प्याज-लहसुन पूर्णतः वर्जित हैं:

  1. 1तामसिक आहार: भगवद्गीता (17.10): तामसिक भोजन = बासी, दुर्गन्धयुक्त, अपवित्र। प्याज-लहसुन = तीव्र गंध, तामसिक गुण। श्राद्ध = पवित्रतम कर्म — केवल सात्त्विक भोजन।
  1. 1पौराणिक कथा: समुद्र मंथन से अमृत निकला। राहु ने छल से अमृत पिया, विष्णु ने सुदर्शन चक्र से गर्दन काटी। राहु के रक्त बूँदों से प्याज और लहसुन उत्पन्न हुए — इसलिए ये 'अमृत तुल्य गुणकारी' किन्तु 'रक्त जनित' = अपवित्र।
  1. 1राजसिक उत्तेजक: प्याज-लहसुन = राजसिक (उत्तेजक) — ये काम, क्रोध, चंचलता बढ़ाते हैं। श्राद्ध = शांत, श्रद्धापूर्ण कर्म — उत्तेजक भोजन अनुचित।
  1. 1पितृ अरुचि: गरुड़ पुराण: पितर तीव्र गंधयुक्त भोजन (प्याज, लहसुन, बासी) से अरुचि करते हैं — उन्हें शुद्ध, सात्त्विक भोजन प्रिय।

श्राद्ध भोजन में वर्जित: प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, बासी भोजन, मसूर दाल (कुछ परम्पराओं में), शलगम।

श्राद्ध भोजन में शुभ: चावल, खीर, पूड़ी, दूध, घी, मिठाई, फल, शाक (बिना प्याज-लहसुन)।

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शास्त्रीय स्रोत
मनुस्मृति, गरुड़ पुराण, भगवद्गीता (17.10)
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