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श्राद्ध-पितृ कर्म📜 गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण2 मिनट पठन

तर्पण में काले तिल क्यों प्रयोग करते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

काले तिल: विष्णु स्वेद से उत्पन्न (पवित्र), पाप नाशक (गरुड़ पुराण), असुर विरोधी (रक्षा), शनि सम्बद्ध (पितृ पक्ष), काला=पितृ लोक/दक्षिण/यम। सफेद तिल तर्पण में नहीं — देव कर्म में। साबुत, शुद्ध।

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विस्तृत उत्तर

तर्पण में काले तिल का प्रयोग अनिवार्य माना गया है:

  1. 1विष्णु जन्म: पुराणों में तिल को भगवान विष्णु के स्वेद (पसीने) से उत्पन्न माना गया है — इसलिए अत्यंत पवित्र। तिल सहित तर्पण = विष्णु कृपा सहित।
  1. 1पाप नाशक: गरुड़ पुराण: 'तिलैस्तर्पयते यस्तु पितॄन्...' — तिल से तर्पण करने से पितरों की तृप्ति होती है और दाता के पाप नष्ट होते हैं।
  1. 1असुर/राक्षस विरोधी: मान्यता है कि तिल में असुर विरोधी शक्ति है। श्राद्ध में तिल प्रयोग से राक्षस/नकारात्मक शक्तियाँ पितरों के भोग को नष्ट नहीं कर पातीं — तिल रक्षा करता है।
  1. 1शनि ग्रह: काला तिल शनि ग्रह से सम्बद्ध। पितृ पक्ष = शनि सम्बंधित काल। काले तिल = शनि प्रसन्नता + पितर तृप्ति।
  1. 1काला रंग = पितृ लोक: काला रंग = पितृ लोक/दक्षिण दिशा/यमराज से सम्बद्ध। काले तिल = पितरों तक पहुँचने का माध्यम।

नियम: केवल काले तिल — सफेद तिल तर्पण में नहीं (सफेद = देव कर्म में)। तिल शुद्ध, साबुत, बिना टूटे हों।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण
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