विस्तृत उत्तर
श्राद्ध कर्म विशिष्ट तिथियों और अवसरों पर करने का विधान है।
प्रमुख श्राद्ध तिथियाँ
1पितृपक्ष (महालय श्राद्ध)
भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक 16 दिनों का काल। इसमें मृत व्यक्ति की मृत्यु तिथि के अनुसार उस दिन श्राद्ध करें।
2वार्षिक श्राद्ध (पुण्यतिथि)
मृत व्यक्ति की मृत्यु तिथि (हिन्दू पंचांग अनुसार) पर प्रतिवर्ष।
3अमावस्या
प्रत्येक मास की अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है। सर्वपितृ अमावस्या (आश्विन कृष्ण अमावस्या) सर्वाधिक महत्वपूर्ण।
4विशेष तिथियाँ
- ▸मकर संक्रान्ति
- ▸ग्रहण काल (सूर्य/चन्द्र ग्रहण)
- ▸अक्षय तृतीया
- ▸गजच्छाया योग
- ▸वैधृति योग
- ▸व्यतिपात योग
5नान्दीमुख श्राद्ध (शुभ अवसरों पर)
विवाह, उपनयन, गृहप्रवेश आदि शुभ कार्यों से पूर्व पितरों को तृप्त करने हेतु।
6मासिक श्राद्ध
मृत्यु के बाद पहले वर्ष में प्रत्येक मास की उसी तिथि पर।
7एकोद्दिष्ट श्राद्ध
मृत्यु के बाद पहले वर्ष में — ये विशेष विधान हैं।
पितृपक्ष में तिथि नियम
- ▸जिस तिथि को व्यक्ति की मृत्यु हुई, उसी तिथि को श्राद्ध।
- ▸तिथि ज्ञात न हो तो सर्वपितृ अमावस्या (पितृपक्ष की अन्तिम अमावस्या) पर करें — यह सभी पितरों के लिए मान्य।
- ▸चतुर्दशी तिथि: अकाल मृत्यु या दुर्घटना से मरने वालों का श्राद्ध।





