विस्तृत उत्तर
श्राद्ध में पितरों को तृप्त करने के लिए विशिष्ट पकवान बनाने का विधान है। गरुड पुराण और अन्य स्मृति ग्रंथों में इसका विस्तृत वर्णन है।
श्राद्ध में प्रमुख पकवान
अनिवार्य/प्रमुख
- ▸खीर (दूध-चावल या दूध-सेवई) — पितरों को सर्वाधिक प्रिय
- ▸पूड़ी/पूरी
- ▸चावल (भात)
- ▸दाल (उड़द की दाल विशेष रूप से शुभ)
- ▸घी
- ▸तिल से बने पकवान
अन्य शुभ पकवान
- ▸लपसी/हलवा
- ▸गुड़ से बने व्यंजन
- ▸सत्तू
- ▸दही
- ▸मालपूआ/पुआ
- ▸लड्डू (तिल के, बेसन के)
- ▸कद्दू/लौकी/पेठे की सब्जी
- ▸अरबी (घुइयाँ/कचालू)
विशेष विधान
- ▸तिल का प्रयोग अवश्य करें — 'तिलैस्तु पितरस्तृप्ताः' (तिल से पितर तृप्त होते हैं)।
- ▸उड़द की दाल पितरों को अत्यन्त प्रिय बताई गई है।
- ▸चाँदी या पत्तल में भोजन परोसें।
- ▸भोजन में घी का प्रयोग अवश्य करें — 'घृतेन श्राद्धं कुर्वीत'।
वर्जित पदार्थ (श्राद्ध में न बनाएँ)
- ▸मसूर की दाल
- ▸चना
- ▸सरसों का तेल (कुछ परम्पराओं में)
- ▸लहसुन, प्याज
- ▸माँसाहार (सात्विक श्राद्ध में)
- ▸बासी भोजन
ध्यान रखें: स्थानीय परम्परा, कुलाचार और क्षेत्रीय रीतियों में भिन्नता होती है। अपने कुल पुरोहित से परामर्श लें। शुद्ध मन और श्रद्धा से बनाया गया सात्विक भोजन ही श्राद्ध में सर्वोत्तम है।


