विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में श्राद्ध और तर्पण का स्वर्लोक से गहरा संबंध बताया गया है। जब भगवान विष्णु से गरुड़ जी पूछते हैं कि पृथ्वी पर ब्राह्मणों को खिलाया गया भोजन पितृलोक या स्वर्लोक में पूर्वजों तक कैसे पहुँचता है तो भगवान विष्णु उत्तर देते हैं कि मंत्रों और गोत्र के उच्चारण के साथ जो भोजन पूर्ण श्रद्धा से ब्राह्मणों को कराया जाता है वह भोजन स्वर्लोक में निवास कर रहे पूर्वजों के लिए साक्षात 'अमृत' में परिवर्तित हो जाता है। यदि कोई पुण्यात्मा स्वर्लोक में गंधर्व बनती है तो वह श्राद्ध का फल आनंददायक कलाओं के रूप में प्राप्त करती है। यदि नाग बनती है तो वायु के रूप में और यदि पशु बनती है तो घास के रूप में प्राप्त करती है। इस प्रकार वैदिक अनुष्ठान सीधे स्वर्लोक की अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं।
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