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श्राद्ध कर्म📜 गरुड पुराण, विष्णु धर्मोत्तर पुराण, धर्मसिन्धु, स्मृति ग्रंथ2 मिनट पठन

वार्षिक श्राद्ध कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

वार्षिक श्राद्ध: मृत्यु तिथि पर प्रतिवर्ष, कुतप काल में। विधि: संकल्प → तिल-जल तर्पण (पितृतीर्थ से) → पिण्डदान (चावल+तिल+जौ+घी) → ब्राह्मण भोजन (विषम संख्या) → दक्षिणा → कौवे-गाय-कुत्ते को भोजन → परिवार भोजन। दक्षिण दिशा मुख। पुत्र/पौत्र करे। सरल: तर्पण + गाय को रोटी + दान।

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विस्तृत उत्तर

वार्षिक श्राद्ध (पुण्यतिथि श्राद्ध) प्रतिवर्ष मृत व्यक्ति की मृत्यु तिथि (हिन्दू पंचांग अनुसार) पर किया जाता है। यह पितरों के प्रति सबसे महत्वपूर्ण नियमित कर्तव्य है।

कब करें

  • मृत्यु की तिथि (हिन्दू पंचांग — मास, पक्ष, तिथि) पर प्रतिवर्ष।
  • कुतप काल (मध्याह्न — लगभग 11:36 से 12:24 के बीच) श्राद्ध का सर्वोत्तम समय।
  • अपराह्न काल भी मान्य।

कर्ता (कौन करे)

  • पुत्र (ज्येष्ठ पुत्र को प्राथमिकता)।
  • पुत्र न हो तो पौत्र, भतीजा, दामाद, या अन्य निकट सम्बन्धी।

विधि

1तैयारी

  • प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र।
  • दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें (पितरों की दिशा)।
  • कुश (दर्भ) घास, तिल, जौ, चावल, जल, गंगाजल।

2संकल्प

अपना नाम, गोत्र, मृत व्यक्ति का नाम-गोत्र, तिथि बताकर श्राद्ध का संकल्प लें।

3तर्पण

  • तिल मिश्रित जल से पितरों को तर्पण दें।
  • दाहिने हाथ के अँगूठे और तर्जनी के बीच (पितृतीर्थ) से जल छोड़ें।
  • 'अमुक गोत्रः अमुक शर्मा/वर्मा तृप्यतु' बोलते हुए।

4पिण्डदान

  • चावल, तिल, जौ, घी मिलाकर पिण्ड (गोल लड्डू) बनाएँ।
  • दक्षिण दिशा में कुश पर पिण्ड रखें।
  • पितरों का आह्वान करें।

5ब्राह्मण भोजन

  • विषम संख्या (1, 3, 5) में ब्राह्मणों को भोजन कराएँ।
  • उन्हें पितरों का प्रतिनिधि मानकर सम्मानपूर्वक भोजन कराएँ।
  • दक्षिणा (धन, वस्त्र, अन्न) दें।

6बलिवैश्वदेव

  • कौवे, कुत्ते, गाय, चींटियों को भोजन का अंश दें।

7विसर्जन

  • पिण्डों को जल में विसर्जित करें या गाय को खिलाएँ।

8परिवार भोजन

  • ब्राह्मण भोजन के बाद परिवार के सदस्य भोजन करें।

सरल विकल्प (यदि विस्तृत विधि सम्भव न हो)

तिल-जल से तर्पण + गाय को रोटी + कौवे को भोजन + ब्राह्मण को दान + श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण — यह भी मान्य है।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड पुराण, विष्णु धर्मोत्तर पुराण, धर्मसिन्धु, स्मृति ग्रंथ
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