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श्राद्ध कर्म⏱ 2 मिनट पठन

पितृपक्ष में क्या करना चाहिए और क्या नहीं?

करें: श्राद्ध-तर्पण, पिण्डदान, ब्राह्मण भोजन, दान, गौ सेवा, कौवे को भोजन, सात्विक आचरण। न करें: विवाह/शुभ कार्य, नई खरीदारी, माँसाहार-मद्यपान, क्रोध-कलह, मसूर-लहसुन-प्याज (श्राद्ध भोजन में)।

संक्षिप्त उत्तर

करें: श्राद्ध-तर्पण, पिण्डदान, ब्राह्मण भोजन, दान, गौ सेवा, कौवे को भोजन, सात्विक आचरण। न करें: विवाह/शुभ कार्य, नई खरीदारी, माँसाहार-मद्यपान, क्रोध-कलह, मसूर-लहसुन-प्याज (श्राद्ध भोजन में)। मूल भावना: पितरों के प्रति श्रद्धा।

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विस्तृत उत्तर

पितृपक्ष (भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या — 16 दिन) पितरों की सेवा का विशेष काल है। इसमें कुछ कार्य करने चाहिए और कुछ से बचना चाहिए।

क्या करना चाहिए

  1. 1श्राद्ध/तर्पण: मृत्यु तिथि अनुसार श्राद्ध और तिल-जल से तर्पण अवश्य करें।
  2. 2पिण्डदान: चावल, तिल, जौ के पिण्ड बनाकर दान।
  3. 3ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा: विद्वान ब्राह्मण को भोजन कराएँ और दक्षिणा दें।
  4. 4दान: वस्त्र, अन्न, तिल, स्वर्ण, चाँदी, गाय आदि का दान।
  5. 5गौ सेवा: गाय को हरा चारा और रोटी खिलाएँ।
  6. 6कौवे को भोजन: कौवे को पितरों का दूत/वाहक माना गया है, अतः उन्हें भोजन का अंश दें।
  7. 7कुत्ते और चींटियों को भोजन: सनातन परम्परा में इनके लिए भी अंश निकालने का विधान।
  8. 8सात्विक आचरण: शुद्ध भोजन, सत्य बोलना, धैर्य रखना।
  9. 9पितरों का स्मरण और प्रार्थना।

क्या नहीं करना चाहिए

  1. 1शुभ कार्य वर्जित: विवाह, मुण्डन, गृहप्रवेश, नामकरण, नया व्यापार आरम्भ — ये सब पितृपक्ष में न करें।
  2. 2नई वस्तु न खरीदें: नया घर, वाहन, आभूषण, कपड़े (शुभ अवसर हेतु) न खरीदें।
  3. 3माँसाहार, मद्यपान वर्जित (आदर्श रूप में)।
  4. 4बाल न कटवाएँ, नाखून न काटें (कुछ परम्पराओं में)।
  5. 5लहसुन, प्याज, मसूर दाल से बचें (श्राद्ध भोजन में)।
  6. 6क्रोध और कलह से बचें।
  7. 7लोहे के बर्तन में श्राद्ध भोजन न बनाएँ।

ध्यान दें: कुछ नियमों में क्षेत्रीय और कुलाचार भेद होता है। मूल भावना है — पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान।

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क्या करना चाहिए

1. श्राद्ध/तर्पण: मृत्यु तिथि अनुसार श्राद्ध और तिल-जल से तर्पण अवश्य करें। 2. पिण्डदान: चावल, तिल, जौ के पिण्ड बनाकर दान। 3. ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा: विद्वान ब्राह्मण को भोजन कराएँ और दक्षिणा दें। 4. दान: वस्त्र, अन्न, तिल, स्वर्ण, चाँदी, गाय आदि का दान। 5. गौ सेवा: गाय को हरा चारा और रोटी खिलाएँ। 6.

क्या नहीं करना चाहिए

1. शुभ कार्य वर्जित: विवाह, मुण्डन, गृहप्रवेश, नामकरण, नया व्यापार आरम्भ — ये सब पितृपक्ष में न करें। 2. नई वस्तु न खरीदें: नया घर, वाहन, आभूषण, कपड़े (शुभ अवसर हेतु) न खरीदें। 3. माँसाहार, मद्यपान वर्जित (आदर्श रूप में)। 4. बाल न कटवाएँ, नाखून न काटें (कुछ परम्पराओं में)। 5. लहसुन, प्याज, मसूर दाल से बचें (श्राद्ध भोजन में)।

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