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जीवन एवं मृत्यु⏱ 2 मिनट पठन

श्राद्ध कब करना चाहिए?

श्राद्ध कब करें — मृत्यु के बाद 10 दिन (पिंडदान), 13वाँ दिन (सपिंडन), प्रतिमास, पितृपक्ष (भाद्र कृष्ण से आश्विन अमावस्या तक), वार्षिक और गया में।

संक्षिप्त उत्तर

श्राद्ध कब करें — मृत्यु के बाद 10 दिन (पिंडदान), 13वाँ दिन (सपिंडन), प्रतिमास, पितृपक्ष (भाद्र कृष्ण से आश्विन अमावस्या तक), वार्षिक और गया में। कुतुप मुहूर्त (अपराह्नकाल) श्राद्ध का उचित समय है।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में श्राद्ध के उचित समय का विस्तृत वर्णन है।

मृत्यु के बाद तत्काल — गरुड़ पुराण में मृत्यु के दिन से प्रारंभ होकर दस दिनों तक प्रतिदिन पिंडदान का विधान है। तेरहवें दिन सपिंडन श्राद्ध होता है।

मासिक श्राद्ध — मृत्यु की तिथि पर प्रत्येक मास श्राद्ध करना चाहिए। पहले वर्ष में 12 मासिक श्राद्ध होते हैं।

पितृपक्ष — भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से आश्विन अमावस्या तक — ये 16 दिन पितृपक्ष के हैं। इसे सर्वाधिक पवित्र समय माना जाता है। गरुड़ पुराण में पितृपक्ष का विशेष महत्व है।

श्राद्ध का समय — कुतुप मुहूर्त (अपराह्नकाल) में श्राद्ध करना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके।

गरुड़ पुराण के तेरहवें अध्याय में कहा गया है — 'तीर्थश्राद्ध, गयाश्राद्ध तथा गजच्छाया योग में, युगादि तिथियों तथा ग्रहण में किया जाने वाला श्राद्ध वर्ष के अंदर नहीं करना चाहिए।' यह विशेष नियम है।

वार्षिक श्राद्ध — एक वर्ष पूर्ण होने पर वार्षिक श्राद्ध और गया श्राद्ध का विधान है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

श्राद्ध कब करना चाहिए को संदर्भ सहित समझें

श्राद्ध कब करना चाहिए का सबसे सीधा सार यह है: श्राद्ध कब करें — मृत्यु के बाद 10 दिन (पिंडदान), 13वाँ दिन (सपिंडन), प्रतिमास, पितृपक्ष (भाद्र कृष्ण से आश्विन अमावस्या तक), वार्षिक और गया में। कुतुप मुहूर्त (अपराह्नकाल)...

जीवन एवं मृत्यु जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।

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जीवन एवं मृत्यु श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।

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यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

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