विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में श्राद्ध के उचित समय का विस्तृत वर्णन है।
मृत्यु के बाद तत्काल — गरुड़ पुराण में मृत्यु के दिन से प्रारंभ होकर दस दिनों तक प्रतिदिन पिंडदान का विधान है। तेरहवें दिन सपिंडन श्राद्ध होता है।
मासिक श्राद्ध — मृत्यु की तिथि पर प्रत्येक मास श्राद्ध करना चाहिए। पहले वर्ष में 12 मासिक श्राद्ध होते हैं।
पितृपक्ष — भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से आश्विन अमावस्या तक — ये 16 दिन पितृपक्ष के हैं। इसे सर्वाधिक पवित्र समय माना जाता है। गरुड़ पुराण में पितृपक्ष का विशेष महत्व है।
श्राद्ध का समय — कुतुप मुहूर्त (अपराह्नकाल) में श्राद्ध करना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके।
गरुड़ पुराण के तेरहवें अध्याय में कहा गया है — 'तीर्थश्राद्ध, गयाश्राद्ध तथा गजच्छाया योग में, युगादि तिथियों तथा ग्रहण में किया जाने वाला श्राद्ध वर्ष के अंदर नहीं करना चाहिए।' यह विशेष नियम है।
वार्षिक श्राद्ध — एक वर्ष पूर्ण होने पर वार्षिक श्राद्ध और गया श्राद्ध का विधान है।





