विस्तृत उत्तर
पितृ तर्पण = पितरों को तिल-जल अर्पित करना।
सरल विधि
- 1समय — प्रातः स्नान बाद; या दोपहर।
- 2दिशा — दक्षिण की ओर मुख करें (पितर = दक्षिण)।
- 3सामग्री — तांबे/मिट्टी पात्र में जल + काले तिल।
- 4हाथ — दाहिने हाथ से अर्पित; अंगूठे और तर्जनी के बीच से (पितृ तीर्थ)।
- 5मंत्र (सरल):
(गोत्र नाम) गोत्राय (मृतक नाम) प्रेताय/पित्रे इदं तिलोदकं तृप्यतु।
या सरल: 'ॐ पितृभ्यो नमः। इदं जलं तृप्यतु।'
- 13 बार जल अर्पित करें।
- 2अंत: जल भूमि पर गिरने दें (किसी पेड़/तुलसी में भी)।
ध्यान दें
- ▸जनेऊ (यज्ञोपवीत) = दाहिने कंधे पर (अपसव्य — पितृ कर्म)।
- ▸जिनके पिता जीवित हैं, उन्हें पितृ तर्पण नहीं करना चाहिए (कुछ परंपरा; कुछ में दादा/पड़दादा का कर सकते)।





