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श्राद्ध एवं पितृ कर्म⏱ 1 मिनट पठन

पितरों के लिए जल कैसे चढ़ाएं विधि सहित?

दक्षिण मुख → तांबे पात्र (जल+काले तिल) → दाहिने हाथ (पितृ तीर्थ) से → 'गोत्राय. . .

संक्षिप्त उत्तर

दक्षिण मुख → तांबे पात्र (जल+काले तिल) → दाहिने हाथ (पितृ तीर्थ) से → 'गोत्राय... तिलोदकं तृप्यतु' → 3 बार अर्पित → भूमि/तुलसी में। जनेऊ दाहिने कंधे। पिता जीवित = पितृ तर्पण नहीं (कुछ परंपरा)।

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विस्तृत उत्तर

पितृ तर्पण = पितरों को तिल-जल अर्पित करना।

सरल विधि

  1. 1समय — प्रातः स्नान बाद; या दोपहर।
  2. 2दिशा — दक्षिण की ओर मुख करें (पितर = दक्षिण)।
  3. 3सामग्री — तांबे/मिट्टी पात्र में जल + काले तिल।
  4. 4हाथ — दाहिने हाथ से अर्पित; अंगूठे और तर्जनी के बीच से (पितृ तीर्थ)।
  5. 5मंत्र (सरल):
(गोत्र नाम) गोत्राय (मृतक नाम) प्रेताय/पित्रे इदं तिलोदकं तृप्यतु।

या सरल: 'ॐ पितृभ्यो नमः। इदं जलं तृप्यतु।'

  1. 13 बार जल अर्पित करें।
  2. 2अंत: जल भूमि पर गिरने दें (किसी पेड़/तुलसी में भी)।

ध्यान दें

  • ▸जनेऊ (यज्ञोपवीत) = दाहिने कंधे पर (अपसव्य — पितृ कर्म)।
  • ▸जिनके पिता जीवित हैं, उन्हें पितृ तर्पण नहीं करना चाहिए (कुछ परंपरा; कुछ में दादा/पड़दादा का कर सकते)।
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

पितरों के लिए जल कैसे चढ़ाएं विधि सहित को संदर्भ सहित समझें

पितरों के लिए जल कैसे चढ़ाएं विधि सहित का सबसे सीधा सार यह है: दक्षिण मुख → तांबे पात्र (जल+काले तिल) → दाहिने हाथ (पितृ तीर्थ) से → 'गोत्राय... तिलोदकं तृप्यतु' → 3 बार अर्पित → भूमि/तुलसी में। जनेऊ दाहिने कंधे। पिता...

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श्राद्ध एवं पितृ कर्म श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।

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यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

श्राद्ध एवं पितृ कर्म प्रश्नोत्तर
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