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शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

'धर्मार्थकाममोक्षाख्या' श्लोक का क्या अर्थ है?

'धर्मार्थकाममोक्षाख्या...' का अर्थ: रसराज (पारद) की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है, इसमें लेशमात्र संदेह नहीं।

धर्मार्थकाममोक्षाख्यारसार्णव तंत्रचार पुरुषार्थ
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वायवीय संहिता में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?

वायवीय संहिता के अनुसार आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य और अन्य सभी अभिलाषाएं रसलिंग (पारद शिवलिंग) के पूजन से सहज ही प्राप्त हो जाती हैं।

वायवीय संहिताआयु आरोग्य ऐश्वर्यमनोवांछित
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रसार्णव तंत्र में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?

रसार्णव तंत्र कहता है: 'रसराज (पारद) की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है, इसमें लेशमात्र संदेह नहीं।'

रसार्णव तंत्रचार पुरुषार्थरसराज प्रसाद
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ब्रह्मवैवर्त पुराण में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?

ब्रह्मवैवर्त पुराण: एक बार भी विधिपूर्वक पारद शिवलिंग का पूजन करने वाला जब तक सूर्य-चंद्र हैं तब तक पूर्ण सुख पाता है और अंततः मोक्ष प्राप्त करता है।

ब्रह्मवैवर्त पुराणएक बार पूजनसूर्य चंद्र
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शिव पुराण में रावण और पारद शिवलिंग का क्या संबंध है?

शिव पुराण की रुद्र संहिता के अनुसार लंकापति रावण — महान तांत्रिक और उच्च कोटि के रसायन शास्त्री — ने पारद शिवलिंग का निर्माण और पूजन करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था।

शिव पुराणरुद्र संहितारावण
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स्कंद पुराण में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?

स्कंद पुराण कहता है कि हजार करोड़ शिवलिंगों की पूजा का अतुलनीय फल पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।

स्कंद पुराणदर्शन मात्रहजार करोड़
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शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति को गहराई से समझने का तरीका

शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।