ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

नैवेद्य और भोग प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

नैवेद्य और भोग से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

कुत्तों को लड्डू खिलाने से क्या होता है?

भैरव का वाहन श्वान (कुत्ता) है — हर मंगलवार को लड्डू कुत्तों को खिलाने से भैरव की कृपा और व्यापार वृद्धि होती है।

कुत्ते लड्डूश्वान सेवामंगलवार
पूरा उत्तर पढ़ें →

बटुक भैरव को शनिवार को क्या चढ़ाते हैं?

बटुक भैरव को शनिवार को उड़द दाल के व्यंजन (दही वड़ा/पकौड़ी) चढ़ाते हैं — इससे शनि, राहु-केतु दोष और ग्रह पीड़ा शमन होता है।

शनिवार नैवेद्यउड़द दालशनि राहु दोष
पूरा उत्तर पढ़ें →

बटुक भैरव को मंगलवार को क्या चढ़ाते हैं?

बटुक भैरव को मंगलवार को घी-गुड़, लापसी या लड्डू चढ़ाते हैं — इससे ऋण मुक्ति, व्यापार वृद्धि और संकट निवारण होता है।

मंगलवार नैवेद्यघी गुड़ लापसी लड्डूऋण मुक्ति
पूरा उत्तर पढ़ें →

बटुक भैरव को कौन सा भोग प्रिय है?

बटुक भैरव को गुड़ और उड़द दाल से बने व्यंजन विशेष रूप से प्रिय हैं। पूजा के बाद नैवेद्य उसी स्थान पर ग्रहण करने का नियम है।

बटुक भैरव भोगगुड़ उड़द दालप्रिय भोग
पूरा उत्तर पढ़ें →

नैवेद्य और भोग — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर नैवेद्य और भोग श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

नैवेद्य और भोग को गहराई से समझने का तरीका

नैवेद्य और भोग प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।