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नित्यकर्म प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

नित्यकर्म से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

देवयज्ञ पितृयज्ञ भूतयज्ञ मनुष्ययज्ञ और ब्रह्मयज्ञ कैसे करें

पंच महायज्ञ: (1) ब्रह्मयज्ञ = वेद/शास्त्र अध्ययन (ऋषि ऋण)। (2) देवयज्ञ = हवन/अग्निहोत्र (देव ऋण)। (3) पितृयज्ञ = तर्पण/श्राद्ध/माता-पिता सेवा (पितृ ऋण)। (4) भूतयज्ञ = गाय-कुत्ते-कौवे-चींटियों को भोजन (प्राणी ऋण)। (5) मनुष्ययज्ञ = अतिथि सत्कार, दान (मनुष्य ऋण)। मनुस्मृति 3.67-72, शतपथ ब्राह्मण।

पंच महायज्ञदेवयज्ञपितृयज्ञ
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संध्या वंदन में ध्यान कैसे करें

संध्या में ध्यान: गायत्री जप के साथ सविता (सूर्य तेज) का ध्यान। प्रातः = बालरूप गायत्री, मध्याह्न = सावित्री, सायं = सरस्वती (शाखा अनुसार)। भ्रूमध्य/हृदय पर ध्यान केन्द्रित, 'तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो' — दिव्य तेज की भावना। 28-108 बार जप। उपांशु (ओठ हिलें, ध्वनि सूक्ष्म)।

संध्या वंदनध्यानगायत्री
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संध्या वंदन में प्राणायाम कैसे करें

संध्या प्राणायाम: सप्त व्याहृतियों + गायत्री मंत्र के साथ। पूरक (बायीं नासिका से श्वास भरना) → कुम्भक (दोनों बन्द, श्वास रोकना) → रेचक (दाहिनी से छोड़ना)। 5 प्राणायाम = पंचप्राण शुद्धि। अनुपात: 1:4:2 (आदर्श)। मन में मंत्र जप। गायत्री जप की तैयारी।

संध्या वंदनप्राणायामगायत्री
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प्रातः संध्या और सायं संध्या में क्या अंतर है

प्रातः vs सायं संध्या: (1) समय: प्रातः = सूर्योदय, सायं = सूर्यास्त। (2) दिशा: प्रातः = पूर्व, सायं = पश्चिम। (3) देवता: प्रातः = मित्र/सूर्य, सायं = वरुण। (4) उपस्थान मंत्र भिन्न। (5) गायत्री जप समान। मूल प्रक्रिया (आचमन, मार्जन, अघमर्षण, गायत्री जप) दोनों में समान।

संध्या वंदनप्रातः संध्यासायं संध्या
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संध्या वंदन में मार्जन प्राशन और अघमर्षण क्या है

मार्जन = जल छिड़ककर बाह्य शुद्धि ('ॐ आपो हि ष्ठा...' मंत्र से शरीर पर)। प्राशन = जल का आचमन करके आन्तरिक शुद्धि। अघमर्षण = 'ॐ ऋतं च सत्यं च...' मंत्र से पाप नाश — हाथ में जल लेकर, नासिका से लगाकर, पाप बाहर निकालने की भावना से बाईं ओर फेंकें। तीनों = गायत्री जप की तैयारी।

संध्या वंदनमार्जनप्राशन
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ब्रह्मयज्ञ क्या है और कैसे करें

ब्रह्मयज्ञ = वेद/शास्त्र का अध्ययन-अध्यापन। पंच महायज्ञों में प्रथम। ऋषि ऋण मुक्ति हेतु। विधि: संध्या के बाद वेद शाखा का पाठ, गायत्री जप, ऋषि तर्पण। सरल रूप: प्रतिदिन गीता/उपनिषद् का कुछ अंश पढ़ना-मनन करना। मनुस्मृति, तैत्तिरीय आरण्यक में विधान।

ब्रह्मयज्ञपंच महायज्ञवेदाध्ययन
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नित्यकर्म — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर नित्यकर्म श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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नित्यकर्म को गहराई से समझने का तरीका

नित्यकर्म प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।