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नित्यकर्म📜 संध्यावन्दन विधि, गृह्यसूत्र, अखण्ड ज्योति (ब्रह्म सन्ध्या)2 मिनट पठन

संध्या वंदन में प्राणायाम कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

संध्या प्राणायाम: सप्त व्याहृतियों + गायत्री मंत्र के साथ। पूरक (बायीं नासिका से श्वास भरना) → कुम्भक (दोनों बन्द, श्वास रोकना) → रेचक (दाहिनी से छोड़ना)। 5 प्राणायाम = पंचप्राण शुद्धि। अनुपात: 1:4:2 (आदर्श)। मन में मंत्र जप। गायत्री जप की तैयारी।

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विस्तृत उत्तर

संध्यावन्दन में प्राणायाम एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण अंग है। यह पंचकोष (आचमन, शिखाबन्धन, प्राणायाम, अघमर्षण, न्यास) में से तीसरा है।

विधि

1आसन

पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके पद्मासन या सुखासन में बैठें।

2मंत्र (विनियोग)

प्राणायाम का मंत्र सप्त व्याहृतियों सहित गायत्री मंत्र है:

ॐ भूः, ॐ भुवः, ॐ स्वः, ॐ महः, ॐ जनः, ॐ तपः, ॐ सत्यम्।

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

ॐ आपोज्योतीरसोऽमृतं ब्रह्म भूर्भुवः स्वः।'

3प्राणायाम क्रिया

पूरक (श्वास भरना)

  • दाहिने हाथ के अँगूठे से दाहिनी नासिका बन्द करें।
  • बायीं नासिका से धीरे-धीरे गहरी श्वास भरें।
  • मन में उपरोक्त मंत्र का जप करें।

कुम्भक (श्वास रोकना)

  • दोनों नासिकाओं को बन्द करें (अँगूठे से दाहिनी, अनामिका-कनिष्ठिका से बायीं)।
  • श्वास को यथाशक्ति रोकें।
  • मन में मंत्र जप।

रेचक (श्वास छोड़ना)

  • बायीं नासिका बन्द रखते हुए दाहिनी से धीरे-धीरे श्वास छोड़ें।
  • मन में मंत्र जप।

यह एक प्राणायाम हुआ। संध्या में 5 प्राणायाम करने का विधान है — जिससे पंचप्राण (प्राण, अपान, व्यान, समान, उदान) का परिमार्जन हो।

अनुपात

पूरक : कुम्भक : रेचक = 1 : 4 : 2 (आदर्श)। आरम्भ में 1:2:1 से शुरू करें।

उद्देश्य

  • मन की एकाग्रता।
  • शरीर-मन की शुद्धि।
  • गायत्री जप की तैयारी।
  • प्राणशक्ति का संचय।
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शास्त्रीय स्रोत
संध्यावन्दन विधि, गृह्यसूत्र, अखण्ड ज्योति (ब्रह्म सन्ध्या)
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