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वाक् सूक्त प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

वाक् सूक्त से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

वाक् सूक्त में सरस्वती की सृजन शक्ति का क्या वर्णन है?

वाक् सूक्त 5वां श्लोक: 'मैं जिस पर प्रसन्न हूँ उसे ब्रह्मा, ऋषि या सुमेधा (श्रेष्ठ बुद्धि वाला) बना दूँ।' सरस्वती केवल किसी की शक्ति नहीं — वे स्वयं आदि-शक्ति हैं जो योगनिद्रा से महाविष्णु को सुलाती और देवताओं को क्षमता देती हैं।

सृजन शक्तिब्रह्मा ऋषि सुमेधाआदि शक्ति
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वाक् सूक्त में सरस्वती ने क्या घोषणा की?

वाक् सूक्त: 'मैं ही रुद्र, वसु, आदित्य, इंद्र-अग्नि-अश्विनी धारण करती हूँ। मैं राष्ट्री (राष्ट्र की अधिष्ठात्री), धन-संपदा देने वाली, यज्ञों में प्रथम पूज्या हूँ। मेरी शक्ति से प्राणी अन्न खाता है, देखता है, श्वास लेता है।'

वाक् सूक्त घोषणारुद्र वसु आदित्यराष्ट्री
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वाक् सूक्त क्या है?

वाक् सूक्त = ऋग्वेद के 10वें मंडल का 125वाँ सूक्त। मन्त्र द्रष्टा = महर्षि अम्भृण की पुत्री 'वाक्'। यह परब्रह्म के साथ एकाकार अवस्था में उनकी 'आत्म-स्तुति' है और दुर्गा सप्तशती का प्रवेश द्वार भी माना जाता है।

वाक् सूक्तअम्भृण सूक्तऋग्वेद दशम मंडल
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वाक् सूक्त — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर वाक् सूक्त श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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वाक् सूक्त को गहराई से समझने का तरीका

वाक् सूक्त प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।