विस्तृत उत्तर
सृजन की स्वतंत्रता: वाक् सूक्त के ५वें श्लोक में देवी कहती हैं: 'मैं जिस पर भी प्रसन्न होती हूँ, जिसे प्रेम करती हूँ, उसे मैं अत्यंत शक्तिशाली बना देती हूँ। मैं चाहूँ तो उसे ब्रह्मा बना दूँ, चाहूँ तो ऋषि बना दूँ, और चाहूँ तो एक श्रेष्ठ बुद्धि वाला मनुष्य (सुमेधा) बना दूँ।'
यह सूक्त स्पष्ट रूप से स्थापित करता है कि सरस्वती (वाक्) केवल विष्णु या ब्रह्मा की शक्ति मात्र नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं वह आदि-शक्ति हैं जो योगनिद्रा के रूप में महाविष्णु को सुलाती हैं और देवताओं को उनकी क्षमता प्रदान करती हैं।





