📖
विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु क्षीरसागर में साधारण नींद में नहीं, बल्कि योगनिद्रा में स्थित बताए गए हैं। यह योगनिद्रा सृष्टि और प्रलय के बीच का परम संतुलन है, जहाँ बाहर से वे शांत दिखाई देते हैं लेकिन भीतर समस्त ब्रह्मांडीय संभावना सुरक्षित रहती है। जीवों के कर्म, प्रकृति की अव्यक्त अवस्था और अगली सृष्टि का बीज इसी अवस्था में धारण रहता है। जब सृजन का समय आता है, तो इसी योगनिद्रा से प्रथम स्पंदन, आदिनाद और विष्णु की प्रथम श्वास प्रकट होती है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?

