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विस्तृत उत्तर
महामाया ने विष्णु को अपने योगनिद्रा रूप को उनसे अलग करके जगाया। ब्रह्मा जी की स्तुति सुनकर देवी प्रसन्न हुईं और भगवान विष्णु के नेत्रों, मुख, नासिका, बाहुओं और हृदय से बाहर आईं। जैसे ही देवी योगनिद्रा ने विष्णु का शरीर छोड़ा, भगवान की दिव्य चेतना जागरण रूप में प्रकट हुई। उन्होंने ब्रह्मा जी की व्यथा सुनी और मधु कैटभ के संकट को समझा। इस प्रसंग से यह समझ आता है कि विष्णु की लीला में भी शक्ति का जागरण आवश्यक है; महामाया ही निद्रा भी हैं और जागरण की प्रेरणा भी।
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