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विस्तृत उत्तर
विष्णु योगनिद्रा में बाहरी रूप से विश्राम करते प्रतीत होते हैं, लेकिन उनकी चेतना में समस्त सृष्टि सुरक्षित रहती है। जीवों के कर्म-संस्कार, अगली सृष्टि की योजना और प्रकृति की अव्यक्त शक्ति उनके संकल्प में स्थित रहती है। यह अवस्था प्रलय और सृष्टि के बीच का दिव्य विराम है। जब सृजन का समय आता है, तो इसी योगनिद्रा से पहला स्पंदन और आदिनाद प्रकट होता है।
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