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विस्तृत उत्तर
हाँ, इस कथा में भगवान विष्णु की योगनिद्रा को सृष्टि-संतुलन की अवस्था माना गया है। वे जीवों की तरह अचेत होकर नहीं सोते, बल्कि परम चेतना में स्थित रहते हैं। उनकी योगनिद्रा में अगली सृष्टि का बीज और जीवों के कर्म सुरक्षित रहते हैं। इसलिए कहा जाता है कि विष्णु विश्राम में भी ब्रह्मांडीय व्यवस्था को धारण करते हैं।
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