विस्तृत उत्तर
तंत्र शास्त्र में काली का स्थान सर्वोच्च है — वे दस महाविद्याओं में प्रथम और आदि शक्ति मानी जाती हैं:
दस महाविद्याओं में काली का स्थान
काली → तारा → त्रिपुरसुंदरी → भुवनेश्वरी → भैरवी → छिन्नमस्ता → धूमावती → बगलामुखी → मातंगी → कमला
काली प्रथम महाविद्या हैं — 'आदि महाविद्या।'
तंत्र में काली का दार्शनिक महत्व
- 1काल की अधिष्ठात्री: 'काली' = काल की शक्ति — जो समय को नियंत्रित करती हैं
> 'कालं कलयते या सा काली' — जो काल को ग्रास करती है वह काली है
- 1महाकुंडलिनी: तंत्र में काली ही कुंडलिनी शक्ति हैं — जो मूलाधार से सहस्रार तक उठती है
- 1महाकाल की शक्ति: शिव = महाकाल (काल के अधिपति); काली = महाकाल की शक्ति। शिव के बिना काली और काली के बिना शिव — दोनों अधूरे हैं।
> 'शिवः शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुम्।' — शंकराचार्य (सौंदर्यलहरी)
- 1तमस का संहार: काली तमस (अज्ञान, आलस्य) का विनाश करती हैं और सत्व (ज्ञान) प्रकाशित करती हैं
- 1मोक्ष प्रदात्री: महानिर्वाण तंत्र में काली को 'मोक्ष देने वाली' कहा गया है
काली के विभिन्न रूप (तंत्र में)
- ▸दक्षिणकाली — सबसे सौम्य, मोक्षदायिनी
- ▸महाकाली — प्रलयंकारी
- ▸श्मशानकाली — श्मशान वासिनी
- ▸भद्रकाली — कल्याणकारी
- ▸गुह्यकाली — अत्यंत गुह्य (रहस्यमय)
- ▸क्रोधकाली — शत्रु नाश
काली का आध्यात्मिक प्रतीकवाद
- ▸काला रंग: सभी रंगों का अवशोषण — सर्वव्यापी शक्ति
- ▸मुंड माला: कटे सिर = अहंकार का विनाश, 50 मुंड = 50 वर्णमाला बीज
- ▸शव पर खड़ी: शिव पर खड़ी होकर सृष्टि का संचालन — चेतना (शिव) + शक्ति (काली)
- ▸चार भुजाएं: खड्ग (विनाश), मुंड (अहंकार नाश), अभय (रक्षा), वर (मोक्ष)
- ▸मुक्त केश: बंधनमुक्त, स्वतंत्र शक्ति
तंत्र का निचोड़: तंत्र में काली माया और मोक्ष — दोनों की देवी हैं।





