विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना के उद्देश्य का वर्णन महानिर्वाण तंत्र और तंत्रालोक में विस्तार से मिलता है:
तंत्र का चतुर्विध उद्देश्य
1धर्म — नैतिक जीवन
तंत्र साधना से साधक का आचरण शुद्ध होता है। देवी/देव कृपा से जीवन में धर्म का प्रवाह।
2अर्थ — समृद्धि
तंत्र केवल वैराग्य नहीं — सांसारिक समृद्धि भी तंत्र का स्वीकृत उद्देश्य है। लक्ष्मी तंत्र, सुभागोदय तंत्र — ये धन-समृद्धि के तंत्र हैं।
3काम — इच्छा पूर्ति
तंत्र जीवन का पूर्ण स्वीकार करता है। अभिनवगुप्त (तंत्रालोक) कहते हैं — 'तंत्र भोग और मोक्ष दोनों साथ देता है।'
4मोक्ष — अंतिम लक्ष्य
महानिर्वाण तंत्र: 'सर्वसाधनानां मुख्यं मोक्षसाधनमेव हि।' — सभी साधनाओं में मोक्ष साधन ही मुख्य है।
तंत्र का दार्शनिक उद्देश्य
अभिनवगुप्त (तंत्रालोक) का मत
तंत्र की साधना का लक्ष्य है — 'शिवोऽहम्' (मैं शिव हूँ) का साक्षात्कार।' यह अद्वैत अनुभव — जहाँ साधक और साध्य एक हो जाएं — तंत्र का परम उद्देश्य है।
त्रिकोण सिद्धांत
- ▸साधक + मंत्र + देवता → एकत्व
- ▸जब यह तीनों एक हो जाएं, तब सिद्धि
सामान्य साधक का उद्देश्य
- ▸भय नाश
- ▸रोग नाश
- ▸समृद्धि
- ▸आत्मिक शांति
- ▸देवी/देव कृपा
कुलार्णव तंत्र
भुक्तिमुक्ति प्रदं तंत्रं' — तंत्र भोग और मुक्ति दोनों देता है।





