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तंत्र दर्शन📜 महानिर्वाण तंत्र, तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), कुलार्णव तंत्र2 मिनट पठन

तंत्र साधना का उद्देश्य क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र का उद्देश्य चतुर्विध है: धर्म (शुद्ध आचरण), अर्थ (समृद्धि), काम (इच्छा पूर्ति) और मोक्ष (परम लक्ष्य)। अभिनवगुप्त (तंत्रालोक): 'शिवोऽहम्' का साक्षात्कार — साधक और देवता एक हो जाएं। कुलार्णव: 'तंत्र भोग और मुक्ति दोनों देता है।'

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना के उद्देश्य का वर्णन महानिर्वाण तंत्र और तंत्रालोक में विस्तार से मिलता है:

तंत्र का चतुर्विध उद्देश्य

1धर्म — नैतिक जीवन

तंत्र साधना से साधक का आचरण शुद्ध होता है। देवी/देव कृपा से जीवन में धर्म का प्रवाह।

2अर्थ — समृद्धि

तंत्र केवल वैराग्य नहीं — सांसारिक समृद्धि भी तंत्र का स्वीकृत उद्देश्य है। लक्ष्मी तंत्र, सुभागोदय तंत्र — ये धन-समृद्धि के तंत्र हैं।

3काम — इच्छा पूर्ति

तंत्र जीवन का पूर्ण स्वीकार करता है। अभिनवगुप्त (तंत्रालोक) कहते हैं — 'तंत्र भोग और मोक्ष दोनों साथ देता है।'

4मोक्ष — अंतिम लक्ष्य

महानिर्वाण तंत्र: 'सर्वसाधनानां मुख्यं मोक्षसाधनमेव हि।' — सभी साधनाओं में मोक्ष साधन ही मुख्य है।

तंत्र का दार्शनिक उद्देश्य

अभिनवगुप्त (तंत्रालोक) का मत

तंत्र की साधना का लक्ष्य है — 'शिवोऽहम्' (मैं शिव हूँ) का साक्षात्कार।' यह अद्वैत अनुभव — जहाँ साधक और साध्य एक हो जाएं — तंत्र का परम उद्देश्य है।

त्रिकोण सिद्धांत

  • साधक + मंत्र + देवता → एकत्व
  • जब यह तीनों एक हो जाएं, तब सिद्धि

सामान्य साधक का उद्देश्य

  • भय नाश
  • रोग नाश
  • समृद्धि
  • आत्मिक शांति
  • देवी/देव कृपा

कुलार्णव तंत्र

भुक्तिमुक्ति प्रदं तंत्रं' — तंत्र भोग और मुक्ति दोनों देता है।
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शास्त्रीय स्रोत
महानिर्वाण तंत्र, तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), कुलार्णव तंत्र
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