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तिथि और माहात्म्य प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

तिथि और माहात्म्य से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

कामिका एकादशी कब मनाई जाती है?

कामिका एकादशी सावन (श्रावण) महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। यह चातुर्मास का वह समय होता है जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं।

कामिका एकादशीश्रावण मासकृष्ण पक्ष
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देवशयनी एकादशी के अन्य नाम क्या हैं (पद्मा, हरिशयनी)?

इस एकादशी को हरिशयनी, शयनी, पद्मा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और 'महा-एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है।

हरिशयनीपद्मा एकादशीपुराण
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देवशयनी एकादशी कब आती है?

देवशयनी एकादशी आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में आती है। इसी पवित्र दिन से 'चातुर्मास' (चार महीने के व्रत और नियम) की शुरुआत होती है।

देवशयनी एकादशीआषाढ़ मासशुक्ल पक्ष
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योगिनी एकादशी कब आती है?

योगिनी एकादशी आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। यह पापों को नष्ट करने और शरीर को स्वस्थ रखने वाली एक बहुत पवित्र तिथि है।

योगिनी एकादशीआषाढ़ मासकृष्ण पक्ष
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मोहिनी एकादशी किस महीने में आती है?

मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आती है। शास्त्रों में वैशाख महीने को सभी महीनों में सबसे पवित्र और श्रेष्ठ माना गया है。

मोहिनी एकादशीवैशाख मासशुक्ल पक्ष
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तिथि और माहात्म्य — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर तिथि और माहात्म्य श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

तिथि और माहात्म्य को गहराई से समझने का तरीका

तिथि और माहात्म्य प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।