विस्तृत उत्तर
धर्मशास्त्रीय परंपरा के अनुसार, देवशयनी एकादशी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में आती है। आध्यात्मिक और ब्रह्मांडीय दृष्टि से यह तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह मात्र एक उपवास का दिन नहीं है, बल्कि उस वृहत्तर आध्यात्मिक चक्र का आरंभ बिंदु है जिसे 'चातुर्मास' कहा जाता है। इस समय सूर्य मिथुन राशि से कर्क राशि में प्रवेशोन्मुख होता है, जो देवताओं की रात्रि (दक्षिणायन) के आरंभ का सूचक है।




