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विस्तृत उत्तर
गुरुवार व्रत का प्रारंभ किसी भी मास के 'शुक्ल पक्ष' (उजले पखवाड़े) के प्रथम गुरुवार से करना श्रेष्ठ माना जाता है। पौष मास (दिसंबर-जनवरी के मध्य) में यह व्रत शुरू नहीं करना चाहिए क्योंकि यह मलमास हो सकता है। यदि गुरुवार के दिन 'पुष्य नक्षत्र' (गुरु-पुष्य योग) या 'अनुराधा नक्षत्र' हो, तो व्रत प्रारंभ करना अत्यंत फलदायी होता है।
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