विस्तृत उत्तर
ब्रह्मवैवर्त पुराण की एक कथा के अनुसार, पूर्ण फल और संकट निवारण के लिए लगातार 32 (बत्तीस) पूर्णिमा तक उपवास रखने का विधान है। कथा के अनुसार धनेश्वर नामक निःसंतान ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने 32 पूर्णिमाओं का व्रत किया था, जिसके प्रभाव से उन्हें न केवल पुत्र मिला, बल्कि जब यमराज उसके 16 वर्षीय पुत्र के प्राण लेने आए तो व्रत के पुण्य से उसे दीर्घायु प्राप्त हुई।





