विस्तृत उत्तर
धर्मशास्त्र और व्रत परंपरा के अनुसार संतोषी माता का व्रत लगातार 16 शुक्रवार (Solah Shukravar) तक करना चाहिए। भक्त अपनी किसी विशेष मनोकामना (जैसे विवाह, संतान, नौकरी, या रोग-मुक्ति) की पूर्ति के लिए 16 शुक्रवार का संकल्प लेते हैं और व्रत पूरा होने के बाद 16वें या 17वें शुक्रवार को इसका विधिवत उद्यापन करते हैं।



