देवी ग्रंथदेवी अर्गला स्तोत्र का पाठ किस उद्देश्य से करें?
अर्गला = 'सांकल/ताला खोलने वाला' — देवी कृपा का द्वार खोले। प्रमुख प्रार्थना: 'रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि' — स्वास्थ्य, विजय, यश दो, शत्रु नाश करो। उद्देश्य: समृद्धि, शत्रु नाश, मनोकामना पूर्ति। पाठ क्रम: कवच → अर्गला → कीलक → मूल सप्तशती।
#अर्गला#दुर्गा सप्तशती#अंगपाठ