विस्तृत उत्तर
कथा के अंत में देव-परंपरा के अनुसार वर्णित फल-श्रुति बताती है कि इस व्रत के प्रभाव से प्राणी को सर्प-भय नहीं सताता और विष अमृत हो जाता है। माता की कृपा से दरिद्र को धन, निर्वंश (बेऔलाद) को संतान और रोगी को निरोगी काया (स्वास्थ्य) की प्राप्ति होती है। गृह-क्लेश मिट जाते हैं, सुहागिनों का सुहाग अखंड रहता है और साधक के जीवन में चारों ओर से मंगलों की वर्षा होती है।





