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विस्तृत उत्तर
स्नान के पश्चात् अंजलि में जल भरकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करने से पितृदोष का शमन होता है, पितरों को तृप्ति मिलती है, और परिवार में सुख-शांति तथा वंश वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
विष्णु पुराण और मत्स्य पुराण स्पष्ट करते हैं कि जो व्यक्ति इस दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण करता है, वह अनंत फल का भागी बनता है।
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