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विस्तृत उत्तर
यजुर्वेद/श्राद्ध कृत्य आधारित तर्पण मन्त्र:
ॐ उदीरतामवर उत्पास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः। ॐ आयन्तु नः पितरः सोम्यासोऽग्निष्वात्ताः पथिभिर्देवयानैः॥
स्नान के पश्चात् अंजलि में जल भरकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करने से पितृदोष का शमन होता है, पितरों को तृप्ति मिलती है, और परिवार में सुख-शांति तथा वंश वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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