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वेद एवं यज्ञ📜 यजुर्वेद संहिता, कात्यायन श्रौतसूत्र, आपस्तम्ब श्रौतसूत्र2 मिनट पठन

यज्ञ में यजुर्वेद के मंत्रों का प्रयोग कैसे होता है

संक्षिप्त उत्तर

यजुर्वेद = कर्मकाण्ड का वेद, अध्वर्यु (यज्ञ कर्ता) का। प्रयोग: अग्नि प्रज्वलन, आहुति ('ॐ अग्नये स्वाहा'), संस्कार मंत्र (विवाह, अन्त्येष्टि)। प्रसिद्ध: गायत्री (36.3), महामृत्युंजय (3.60), पुरुष सूक्त। गद्यात्मक शैली — क्रिया के स्पष्ट निर्देश। आज भी संस्कारों में सर्वाधिक प्रयुक्त।

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विस्तृत उत्तर

यजुर्वेद का नाम ही 'यज्ञ' से है — 'यजुष्' = यज्ञीय मंत्र। यह कर्मकाण्ड प्रधान वेद है और यज्ञ की व्यावहारिक क्रियाओं का मूल स्रोत है।

अध्वर्यु — यजुर्वेद का ऋत्विज्

अध्वर्यु वह ऋत्विज् है जो यज्ञ का वास्तविक कर्म सम्पादित करता है। उसका प्रधान वेद यजुर्वेद है।

यजुर्वेद के मंत्रों का प्रयोग

1यज्ञ क्रियाओं के निर्देश

यजुर्वेद के मंत्र (यजुष्) यज्ञ की प्रत्येक क्रिया के लिए हैं — अग्नि प्रज्वलन, हवि (आहुति सामग्री) तैयार करना, आहुति देना, यज्ञकुण्ड की रचना, सामग्री का अर्पण।

2'स्वाहा' मंत्र

यज्ञ में प्रत्येक आहुति 'स्वाहा' बोलकर दी जाती है। अधिकांश आहुति मंत्र यजुर्वेद से हैं:

  • 'ॐ अग्नये स्वाहा, इदमग्नये इदं न मम।'
  • 'ॐ सोमाय स्वाहा'
  • 'ॐ प्रजापतये स्वाहा'

3संस्कार मंत्र

आज भी सभी प्रमुख संस्कारों (विवाह, उपनयन, अन्त्येष्टि आदि) में प्रयुक्त मंत्र अधिकांशतः यजुर्वेद से हैं:

  • विवाह: सप्तपदी, लाजाहोम, पाणिग्रहण मंत्र
  • अन्त्येष्टि: दाह संस्कार मंत्र

4प्रसिद्ध मंत्र

  • गायत्री मंत्र (36.3) — शुक्ल यजुर्वेद में भी
  • महामृत्युंजय मंत्र (3.60)
  • पुरुष सूक्त (31वाँ अध्याय)
  • शिवसंकल्प सूक्त (34.1-6)

5गद्यात्मक शैली

यजुर्वेद के मंत्र प्रायः गद्य (यजुष्) में हैं — ये यज्ञ की प्रत्येक क्रिया के लिए स्पष्ट निर्देश देते हैं। इसीलिए यजुर्वेद को 'कर्मकाण्ड का वेद' कहा जाता है।

दो शाखाएँ

  • कृष्ण यजुर्वेद (दक्षिण भारत — तैत्तिरीय संहिता): मंत्र और ब्राह्मण मिश्रित।
  • शुक्ल यजुर्वेद (उत्तर भारत — वाजसनेयी संहिता): केवल शुद्ध मंत्र।

सारांश

यजुर्वेद = यज्ञ का 'कैसे करें' manual। अध्वर्यु इसके मंत्रों से यज्ञ की प्रत्येक क्रिया सम्पादित करता है। आज के संस्कारों में भी यजुर्वेद के मंत्र सर्वाधिक प्रयुक्त होते हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
यजुर्वेद संहिता, कात्यायन श्रौतसूत्र, आपस्तम्ब श्रौतसूत्र
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