विस्तृत उत्तर
पिता के तर्पण में वसुरूप शब्द इसलिए बोला जाता है क्योंकि पितृ वर्गीकरण में पिता प्रथम पीढ़ी के पितृ हैं और उन्हें वसु स्वरूप माना गया है। वसु भौतिक तत्त्वों, स्थूलता और निकटतम भौतिक संबंध के प्रतीक हैं। पिता यजमान के भौतिक शरीर का सबसे निकटतम कारण है, इसलिए श्राद्ध और तर्पण में पिता को वसु रूप में स्थापित किया जाता है। तर्पण मंत्र में कहा जाता है—'अद्येह अमुक गोत्रः अस्मत् पिता अमुक शर्मा वसुरूपः तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः।' इसका भावार्थ है कि हे वसु स्वरूप, मेरे अमुक गोत्र और अमुक नाम वाले पिता तृप्त हों, मैं यह तिलयुक्त जल उन्हें स्वधा के साथ अर्पित करता हूँ।
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