विस्तृत उत्तर
यजुर्वेद (19.21, 21.40) में होम के लिए उपयोगी कतिपय पदार्थों का विस्तृत विवरण प्राप्त होता है, जिनमें धाना (भुने हुए जौ), करम्भ (सत्तू), परिवाप (भुने हुए धान), पय (दूध) और दधि (दही) को मुख्य माना गया है।
स्वामी दयानन्द सरस्वती एवं परवर्ती यज्ञ-मीमांसकों ने देव-यज्ञ में प्रयुक्त होने वाले हविष्य को उनके औषधीय एवं वैज्ञानिक गुणों के आधार पर चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया है:
१. सुगन्धित पदार्थ: केशर, अगर, तगर, श्वेत चन्दन, कपूर, इलायची, जायफल, जावित्री, छड़ीला, छालबीला, नागरमोथा, कोकिला — वातावरण की दुर्गंध नष्ट करना, मन को शांति प्रदान करना एवं देवताओं को प्रसन्न करना।
२. पुष्टिकारक पदार्थ: गोघृत (गाय का घी), पंचमेवा (काजू, बादाम, अखरोट आदि), जौ (यव), तिल, अक्षत (चावल), शहद, सूखा नारियल (गोला) — वायुमंडल में पोषक तत्वों की वृद्धि करना तथा शारीरिक ओज एवं बल बढ़ाना।
३. मिष्ट (मधुर) पदार्थ: शक्कर, खाण्ड, गुड़, छुआरा, किशमिश, मुनक्का — वायु को मधुर एवं स्वास्थ्यप्रद बनाना तथा देवताओं को प्रिय भोग अर्पित करना।
४. रोगनाशक वनस्पति: गिलोय, तुलसी, सोमवल्ली, अपामार्ग, भूमि आंवला, भृंगराज, ब्राह्मी, शतावर, अश्वगंधा, मुलेठी, पुनर्नवा, दालचीनी — हानिकारक जीवाणुओं, विषाणुओं का नाश कर पर्यावरण एवं शरीर को निरोगी बनाना।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





