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शिव पूजा विधि📜 यजुर्वेद (रुद्राष्टाध्यायी), शिव पुराण1 मिनट पठन

सावन में रुद्राभिषेक करवाने का क्या विशेष महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

सावन + रुद्राभिषेक = सर्वोत्तम। 'श्रावणे पूजयेत शिवम्' + यजुर्वेद मंत्र + 11 द्रव्य। सोमवार पर त्रिगुणित। सर्वपाप नाश, ग्रह शांति, धन, मोक्ष। स्तर: रुद्री→लघुरुद्र→महारुद्र→अतिरुद्र।

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विस्तृत उत्तर

सावन में रुद्राभिषेक अत्यंत विशेष और फलदायी:

क्यों विशेष

  1. 1श्रावणे पूजयेत शिवम्: सावन = शिव का सबसे प्रिय मास। इस मास में की गई कोई भी शिव पूजा विशेष फलदायी — रुद्राभिषेक तो सर्वोत्तम।
  2. 2रुद्राभिषेक = वैदिक मंत्रों से अभिषेक: यजुर्वेद रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों के उच्चारण के साथ 11 द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक — सबसे शक्तिशाली शिव पूजा।
  3. 3सावन सोमवार पर: रुद्राभिषेक + सोमवार + सावन = त्रिगुणित फल।

लाभ

  • सर्वपाप नाश, रोग निवारण।
  • ग्रह दोष (शनि/राहु/केतु) शांति।
  • धन-समृद्धि, शत्रु नाश।
  • मनोकामना पूर्ति।
  • मोक्ष मार्ग प्रशस्त।

स्तर: रुद्री (1 बार) → लघुरुद्र (11 बार) → महारुद्र (11×11=121 बार) → अतिरुद्र (11×121=1331 बार)।

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शास्त्रीय स्रोत
यजुर्वेद (रुद्राष्टाध्यायी), शिव पुराण
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