विस्तृत उत्तर
हाँ, पारंपरिक फल-श्रुति के अनुसार जो भी प्राणी पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से माता मनसा देवी की इस अक्षुण्ण कथा को पढ़ता या सुनता है, उसे जीवन में तो क्या, स्वप्न में भी कभी सर्पों का भय नहीं सताता। यदि दुर्भाग्यवश विष का प्रभाव हो भी जाए, तो माता की कृपा से वह विष अमृत के समान निष्प्रभावी हो जाता है। यह कथा सुनने वाले की आगामी पीढ़ियों (वंश) को भी नाग-भय कभी नहीं होता।





