विस्तृत उत्तर
देवी मन्दिर में चुनरी (ओढ़नी/दुपट्टा) बाँधना/चढ़ाना एक प्रमुख भक्ति परम्परा है।
विधान
1कब बाँधें
मनोकामना पूर्ति हेतु, नवरात्रि में, या किसी विशेष अवसर पर। मनोकामना पूरी होने पर 'मन्नत' के रूप में भी।
2रंग
- ▸लाल चुनरी सर्वोत्तम — लाल = शक्ति, सौभाग्य, माँ दुर्गा का प्रिय रंग।
- ▸पीली, केसरिया भी शुभ।
- ▸काली चुनरी = काली माता के मन्दिर में।
3विधि
- ▸स्नान/शुद्धि के बाद मन्दिर जाएँ।
- ▸चुनरी पर हल्दी-कुमकुम छिड़कें।
- ▸देवी प्रतिमा/मूर्ति को चुनरी ओढ़ाएँ।
- ▸मन्दिर परिसर में वृक्ष/स्तम्भ पर भी बाँधने की परम्परा (मनोकामना हेतु)।
- ▸'ॐ दुर्गायै नमः' या 'जय माता दी' बोलकर अर्पित।
4मनोकामना चुनरी
- ▸सुहागिनें पति की दीर्घायु हेतु लाल चुनरी चढ़ाती हैं।
- ▸कुंवारी कन्याएँ मनचाहे वर हेतु।
- ▸मनोकामना पूरी हो तो पुनः चुनरी + प्रसाद चढ़ाएँ।
शक्तिपीठों में
वैष्णो देवी, विन्ध्यवासिनी, कामाख्या, मैहर देवी आदि शक्तिपीठों पर चुनरी चढ़ाने की विशेष परम्परा।
ध्यान दें: चुनरी शुद्ध/नई होनी चाहिए। प्रयुक्त/गन्दी चुनरी न चढ़ाएँ।





