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देवी उपासना⏱ 2 मिनट पठन

देवी मंदिर में चुनरी बांधने का क्या विधान है?

देवी चुनरी: लाल सर्वोत्तम (शक्ति/सौभाग्य)। स्नान → हल्दी-कुमकुम छिड़कें → देवी को ओढ़ाएँ / मन्दिर में बाँधें → 'ॐ दुर्गायै नमः'। मनोकामना/मन्नत हेतु।

संक्षिप्त उत्तर

देवी चुनरी: लाल सर्वोत्तम (शक्ति/सौभाग्य)। स्नान → हल्दी-कुमकुम छिड़कें → देवी को ओढ़ाएँ / मन्दिर में बाँधें → 'ॐ दुर्गायै नमः'। मनोकामना/मन्नत हेतु। सुहागिनें पति दीर्घायु, कन्याएँ वर प्राप्ति हेतु। शक्तिपीठों में विशेष परम्परा। नई/शुद्ध चुनरी।

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विस्तृत उत्तर

देवी मन्दिर में चुनरी (ओढ़नी/दुपट्टा) बाँधना/चढ़ाना एक प्रमुख भक्ति परम्परा है।

विधान

1कब बाँधें

मनोकामना पूर्ति हेतु, नवरात्रि में, या किसी विशेष अवसर पर। मनोकामना पूरी होने पर 'मन्नत' के रूप में भी।

2रंग

  • ▸लाल चुनरी सर्वोत्तम — लाल = शक्ति, सौभाग्य, माँ दुर्गा का प्रिय रंग।
  • ▸पीली, केसरिया भी शुभ।
  • ▸काली चुनरी = काली माता के मन्दिर में।

3विधि

  • ▸स्नान/शुद्धि के बाद मन्दिर जाएँ।
  • ▸चुनरी पर हल्दी-कुमकुम छिड़कें।
  • ▸देवी प्रतिमा/मूर्ति को चुनरी ओढ़ाएँ।
  • ▸मन्दिर परिसर में वृक्ष/स्तम्भ पर भी बाँधने की परम्परा (मनोकामना हेतु)।
  • ▸'ॐ दुर्गायै नमः' या 'जय माता दी' बोलकर अर्पित।

4मनोकामना चुनरी

  • ▸सुहागिनें पति की दीर्घायु हेतु लाल चुनरी चढ़ाती हैं।
  • ▸कुंवारी कन्याएँ मनचाहे वर हेतु।
  • ▸मनोकामना पूरी हो तो पुनः चुनरी + प्रसाद चढ़ाएँ।

शक्तिपीठों में

वैष्णो देवी, विन्ध्यवासिनी, कामाख्या, मैहर देवी आदि शक्तिपीठों पर चुनरी चढ़ाने की विशेष परम्परा।

ध्यान दें: चुनरी शुद्ध/नई होनी चाहिए। प्रयुक्त/गन्दी चुनरी न चढ़ाएँ।

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1. कब बाँधें

मनोकामना पूर्ति हेतु, नवरात्रि में, या किसी विशेष अवसर पर। मनोकामना पूरी होने पर 'मन्नत' के रूप में भी।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

देवी मंदिर में चुनरी बांधने का क्या विधान है को संदर्भ सहित समझें

देवी मंदिर में चुनरी बांधने का क्या विधान है का सबसे सीधा सार यह है: देवी चुनरी: लाल सर्वोत्तम (शक्ति/सौभाग्य)। स्नान → हल्दी-कुमकुम छिड़कें → देवी को ओढ़ाएँ / मन्दिर में बाँधें → 'ॐ दुर्गायै नमः'। मनोकामना/मन्नत हेतु। सुहागिनें पति दीर्घायु, कन्याएँ वर...

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